आयुष्मान भारत को बिलासपुर में खुद इलाज की जरूरत, जानिए आखिर क्यों परेशान हैं अधिकारी

आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत सूची में शामिल लाभार्थियों को तलाश कर जागरुक किया जा रहा है। इसी क्रम में बिलासपुर दनकौर नगरी में 1093 परिवार सूची में है। जिनमें 380 परिवार गोल्डन कार्ड बनने से वंचित है।

Prateek KumarWed, 13 Oct 2021 03:34 PM (IST)
योजना से जुड़े लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाने में स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा/बिलासपुर [घनश्याम पाल]। सूची में गांव का नाम दर्ज है। लाभार्थी परिवार और उसके सदस्यों के नाम भी अंकित हैं। लेकिन जब इनकी तलाश की गई तो गांव मिला लेकिन लाभार्थी परिवार नहीं मिल रहे। इस घटना से खुद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी असमंजस हैं। आखिर लाभार्थी सूची तैयार करने में इतनी बड़ी हेराफेरी कैसे हो सकती है। अब मामले की जांच हो रही है। मामला प्रधानमंत्री की लोकप्रिय योजना आयुष्मान भारत का है। गरीब और असहायों की सेहत का ख्याल रखने वाली इस योजना को खुद इलाज की जरूरत है। ऐसी परिस्थिति में योजना से जुड़े लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाने में स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट रहे हैं।

आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत सूची में शामिल लाभार्थियों को तलाश कर जागरुक किया जा रहा है। इसी क्रम में बिलासपुर दनकौर नगरी में 1093 परिवार सूची में है। जिनमें 380 परिवार गोल्डन कार्ड बनने से वंचित है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 4123 परिवार सूची में है। 211 परिवार कार्ड बनने से वंचित है।

कछुआ चाल से चला अभियान

60634 लाभार्थी परिवारों के सदस्यों का गोल्डन कार्ड बनाने का अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी का कार्ड बनाया जाना जरूरी है। लेकिन, इस अभियान के अंतर्गत अब तक 48560 परिवार का कार्ड बन सका है। ऐसे में अब भी 12074 परिवार गोल्डन कार्ड बनने से वंचित है। अधिकारियों का कहना है कि विशेष अभियान के तहत वंचित परिवारों का गोल्डन कार्ड बनाया जाना था। लेकिन, इनमें कुछ परिवारों का कहीं अता पता नही चला। गांव व शहर में मौजूद नहीं थे।

इन वजहों से प्रभावित हो रहा अभियान

-स्वास्थ्य विभाग की मानें तो जनसेवा केंद्रों की ओर से गोल्डन कार्ड बनाने में लापरवाही बरती जा रही है।

-अधिकारियों द्वारा सख्ती बरतने के बावजूद जनसेवा केंद्र गोल्डन कार्ड बनाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।

-2011 के दौरान बनाई गई बिलो इकनॉमिक पावर की सूची में कई कमियां हैं।

-दिए गए पते पर लाभार्थियों का अस्तित्व ही नहीं मिल रहा है।

-कई मोहल्लों में लाभार्थी परिवार अब कही दूसरी जगह जा चुके हैं।

-सूची में शामिल पता मोबाईल का भी हकीकत में कोई अस्तित्व नहीं मिल रहा।

-बहुत से अमीर लोग हैं जो योजना को लेकर जागरुक नहीं हैं। वह भी गोल्डन कार्ड नहीं बनवा रहे हैं।

आयुष्मान योजना की लाभार्थी सूची में शामिल परिवार और सदस्य के नाम ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। पता, मोबाईल और परिवार लापता होने के साथ हजारों लोग अपना पता भी बदल चुके हैं। ऐसे में एक-एक लाभार्थी की जानकारी प्राप्त करना आसान नहीं है। कई लोग ऐसे हैं जो योजना में जागरुक ही नहीं हैं।

राकेश ठाकुर, शिकायत प्रबंधक आयुष्मान भारत योजना गौतमबुद्धनगर

आयुष्मान भारत योजना आज तक डाटा

1- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना कुल परिवार 34425

2- मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना कुल परिवार 1539

3- अन्त्रोदय कार्ड कुल परिवार 7852

4- लेवर कार्ड कुल परिवार 16818

-कितने गोल्डन कार्ड अब तक बनाए गए 48560

-कितने अब भी शेष बनने है 12074

- दनकौर + बिलासपुर नगरी कुल कितने परिवार, कितने बने, कितने बाकी।

1093 परिवार थे ,380 परिवार रह गए

- दनकौर ग्रामीण क्षेत्र कुल परिवार, कितने बने, कितने शेष।

4123. जिसमें गाँव में 211 परिवार रह गए

अथॉरिटी गाँव में कितने बने है ये ट्रैक नहीं कर सकते

- जिले में 49 सरकारी व निजी अस्पताल में योजना के तहत 5 लाख तक गोल्डन कार्ड धारक लाभ ले सकता है।

राकेश ठाकुर, प्रबंधक शिकायत आयुष्मान भारत योजना गौतमबुद्ध नगर

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