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ईएसआइसी में कोविड के साथ नान कोविड मरीज भटकने को मजबूर

ईएसआइसी में कोविड के साथ नान कोविड मरीज भटकने को मजबूर

जागरण संवाददाता नोएडा सेक्टर-24 स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) अस्पताल को 22 अप्रैल को कोविड अस्पताल में तब्दील किया गया था लेकिन यहां न तो कोविड मरीजों को इलाज मिल पा रहा और न ही नान कोविड मरीजों को।

JagranSat, 15 May 2021 08:51 PM (IST)

जागरण संवाददाता, नोएडा : सेक्टर-24 स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) अस्पताल को 22 अप्रैल को कोविड अस्पताल में तब्दील किया गया था, लेकिन यहां न तो कोविड मरीजों को इलाज मिल पा रहा और न ही नान कोविड मरीजों को। इलाज के अभाव में मरीज भटकने को मजबूर हैं। कई कोरोना संदिग्ध इलाज के अभाव में गेट पर दम तोड़ चुके हैं, लेकिन अस्पताल के पास ऐसे मरीजों का कोई डाटा नहीं है।

अस्पताल में 102 कोविड बिस्तरों पर इलाज की सुविधा उपलब्ध है। आइसीयू व वेंटिलेटर के 12, आक्सीजन के 60, वहीं सामान्य मरीजों के लिए 30 बेड उपलब्ध हैं। वर्तमान में आइसीयू के एक, आक्सीजन के 15 व सामान्य मरीजों के लिए 26 बेड खाली है, लेकिन जब कोई मरीज आइसीयू बेड के लिए संपर्क करता है तो उसे बेड खाली नहीं होने की जानकारी दी जाती है। इस संबंध में अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. बलराज भंडार को फोन करके उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन नहीं उठा।

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आक्सीजन के अभाव में नहीं बढ़ाए जा सके बेड :

अस्पताल में आक्सीजन के अभाव में कोरोना के बेड नहीं बढ़ाए जा सके हैं, जबकि यहां एक साथ 300 भर्ती मरीजों का उपचार किया जा सकता है। बेड नहीं बढ़ने से ओपीडी का स्टाफ घर बैठा है, जबकि अस्पताल में स्थायी व अस्थायी करीब 1050 स्वास्थ्यकर्मी कार्यरत है। इनमें 70 डॉक्टर स्थायी है तो वहीं 80 से अधिक डॉक्टर स्थायी है। 900 से अधिक पैरामेडिकल स्टाफ है।

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सात लाख रुपये खर्च करके की अलग व्यवस्था :

पिछले वर्ष कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने संक्रमितों के इलाज की वजह से नान कोविड मरीजों के इलाज पर इसका असर न पड़े। इसके लिए अस्पताल के अंदर व बाहर जाने के लिए एक विशेष गलियारा तैयार किया गया था, जिसमें करीब सात लाख रुपये खर्च हुए थे। बावजूद इसके अस्पताल की ओपीडी बंद है।

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मरीज स्वयं भर्ती हो रेफरल अस्पतालों में करा रहे इलाज :

ओपीडी बंद होने से नान कोविड मरीज परेशान है। ऐसे मरीज इलाज के लिए डिस्पेंसरी पर निर्भर हैं, जो मरीज गंभीर है वह ईएसआइसी के रेफरल अस्पतालों में पहुंचकर इलाज करा रहे हैं। डॉक्टर तृतीयक श्रेणी के मरीजों को रेफर कर रहे हैं।

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मेरे पति पिछले कई दिन से गंभीर बीमारी से परेशान है। डॉक्टरों ने सेक्टर-12 स्थित मेट्रो अस्पताल रेफर किया है। पिछले दो दिन से पति के रेफरल कागज बनवाने के लिए भटक रही हूं।

-शकुंतला

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पिता को आइसीयू बेड की सख्त जरूरत है। पोर्टल के जरिये अस्पताल में बेड खाली होने की जानकारी मिली थी, लेकिन डॉक्टरों से पता चला है कि यहां कोई बेड खाली नहीं है।

- रोहित कुमार

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