हाथों में किताब थामकर उड़ान भरेंगे नन्हे परिदे

हाथों में किताब थामकर उड़ान भरेंगे नन्हे परिदे

जागरण संवाददाता नोएडा नोएडा पुलिस की नन्हें परिदे योजना से शहर की मलिन बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवार के बच्चे हाथों में किताब थामकर शिक्षितों की जमात में शामिल हो रहे हैं।

JagranMon, 22 Mar 2021 10:21 PM (IST)

जागरण संवाददाता, नोएडा : नोएडा पुलिस की नन्हे परिदे योजना से शहर की मलिन बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवार के बच्चे हाथों में किताब थामकर शिक्षितों की जमात में शामिल हो रहे हैं। ये हाथों में कापी, किताब व पेंसिल लेकर आसमान छूने की तैयारी में है। पढ़ाई लिखाई में समय देने से बच्चे ना सिर्फ अपराध से दूर हो रहे हैं, बल्कि उन्हें अपना भविष्य भी उज्जवल दिख रहा है।

वर्तमान में योजना के तहत मोबाइल वैन के माध्यम से सेक्टर-18, सेक्टर-52, सेक्टर-126 व बाटेनिकल गार्डन के पास बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। मोबाइल वैन प्रतिदिन दो स्थानों पर जाकर सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे व 2 से शाम 5 बजे तक रहती है। यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलकूद, आर्ट एंड कल्चर, अंग्रेजी भाषा का ज्ञान, सेल्फ डिफेंस आदि विषयों की जानकारी दी जा रही है। योजना के जरिये भीख मांगते, गुलाब, खिलौने और रोजमर्रा का सामान बेचने वाले बच्चों को बुनियादी शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। पुलिस ने चेतना एनजीओ व एचसीएल फाउंडेशन के साथ मिलकर यह पहल की है।

मोबाइल वैन की चालक महिलाएं : डिजिटल शिक्षा के लिए मोबाइल वैन में एलइडी टीवी व साउंड सिस्टम लगा है। सभी बच्चों का समय-समय पर मेडिकल परीक्षण भी होता है। योजना का मुख्य उद्देश्य जिले में मोबाइल वैन संचालित कर गरीब व वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें पढ़ने के लिए सुरक्षित स्थान देना है। अभी दो मोबाइल वैन चलाई जा रही हैं। इसके चालक व शिक्षक महिलाएं हैं। महिला सशक्तीकरण भी इसका एक उद्देश्य है।

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पांच मोबाइल वैन चलाने की योजना :

योजना के तहत पांच मोबाइल वैन चलाई जाएंगी। योजना से जुड़ी चेतना एनजीओ के मुताबिक, जिले में अगले तीन साल में पांच मोबाइल वैन चलाकर गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। एचसीएल फाउंडेशन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस योजना से अधिक से अधिक जिले को जोड़ा जाएगा।

वर्जन..

बच्चों को शिक्षा के साथ पुलिस हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी जानकारी दी जाती है। उन्हें पढ़ाई के साथ पौष्टिक आहार भी दिया जाता है।

-रजनीश वर्मा, एसीपी नोएडा (नोडल अधिकारी नन्हें परिदे योजना)

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