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लोगों को पेड़ों की महत्ता समझने की जरूरत

अजब सिंह भाटी, ग्रेटर नोएडा

पेड़-पौधों का मानव जीवन में बहुत बड़ा स्थान है। इनसे हमें शुद्ध हवा, फल, वनस्पति व औषधि मिलती हैं। लोग भूल गए हैं कि एक पेड़ जब तक हरा-भरा रहता है, तब तक पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करता है। सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पेड़ों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। पेड़ों की महत्ता को देखते हुए इनके संरक्षण के लिए हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन औद्योगिकीकरण व निजी स्वार्थ के चलते मनुष्य मौजूदा समय में पेड़ों की महत्ता को दरकिनार करने में लगा है।

पर्यावरणविदों के मुताबिक, हर साल हजारों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन इसके बाद प्रशासनिक अमला उनका संरक्षण करना भूल जाता है। खाद व पानी के अभाव के साथ पौधे रोपित करने की दोषपूर्ण नीतियों के चलते आधे से अधिक पौधे सूख जाते हैं। पौधों के न पनपने की एक वजह दीमक भी है। वनस्पति विज्ञानी की माने तो जमीन की तासीर का चयन कर पौधे रोपित करने चाहिए। रोका जाए पेड़ों का अवैध कटान

आज मानव अपने स्वार्थो को पूरा करने के लिए जीवनदायी पेड़, पौधों को काटकर न सिर्फ खुद बल्कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है। पेड़-पौधे के महत्व को दरकिनार करते हुए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। निजी स्वार्थ के लिए पौधे नष्ट किए जा रहे हैं। शहर में आलम यह है कि सेक्टरों में हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए। अतिक्रमणकारी निजी स्वार्थो के लिए इन पेड़ों को काट रहे हैं। स्थानीय लोग मनमाने तरीके से घर के सामने लगे पेड़ों की छंटाई अथवा कटाई कर देते हैं, इसकी निगरानी के लिए न तो प्राधिकरण कुछ कर रहा है और न ही वन विभाग कोई कदम उठा रहा। यदि लोग शिकायत करते हैं तो जुर्माना वसूलकर इतिश्री कर ली जाती है। पेड़ों के संरक्षण को गंभीर होने की जरूरत है। पौधारोपण के बाद देखभाल का अभाव

जिले में शहरी व देहात क्षेत्र में छोटे-बड़े उद्योग धंधों, बहुमंजिला इमारतों की बाढ़ सी आ गई है। विकास की दौड़ में अंधी विकास एजेंसियां खुद बसावट को लेकर धड़ल्ले से पेड़ों का अवैध कटान कर रही हैं। उद्योग धंधों से निकलनेवाली जहरीली गैस पर्यावरण को दूषित कर रही हैं। प्राकृतिक आपदाएं, प्रकृति के असंतुलन से लगातर बढ़ रही हैं। यदि इन पर अंकुश लगाना है तो पौधारोपण पर अधिक जोर देना होगा। पौधारोपण करने के बाद उनकी सुरक्षा करना बेहद जरूरी हो जाता है। प्रतिवर्ष लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन सुरक्षा एवं देखभाल के अभाव में वे पनपने से पहले दम तोड़ जाते हैं। इससे कोई लाभ नहीं होने वाला है। हमें यह निश्चय करना होगा कि जहां से एक पेड़ कटे, वहां कम से कम दो पौधे लगाए जाएं। यहीं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल होगी। पौधे पानी व खाद के अभाव में कम लगाने की विधि दोषपूर्ण होने की वजह से ज्यादा सूखते हैं। जमीन की तासीर का चयन कर पौधे रोपित किए जाने चाहिएं। साथ ही स्वावलंबन भारत के नारे को ध्यान में रखकर ऐसे पौधे लगाए जाएं, जिससे ईधन, फल के साथ औषधि प्राप्त हो।

-डॉक्टर डीके गर्ग, वनस्पति शास्त्री

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