अहोई अष्टमी) संतान की रक्षा व लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

जागरण संवाददाता ग्रेटर नोएडा संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने बृहस्पतिवार को निर्जला व

JagranThu, 28 Oct 2021 06:53 PM (IST)
अहोई अष्टमी) संतान की रक्षा व लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने बृहस्पतिवार को निर्जला व्रत रखा, अहोई अष्टमी माता की पूजा कीं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन संतान की रक्षा, सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाओं ने शाम को तारों की छांव में अपने व्रत का पारण किया। व्रत के दौरान अहोई देवी का चित्र बनाकर पूजा अर्चना की गई। करवा चौथ की तरह ही इस दिन भी महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। संतान प्राप्ति की कामना को लेकर भी व्रत रखती हैं। मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत रखने से संतान के सभी संकट दूर हो जाते हैं।

सेक्टर की महिलाओं ने समूह में की पूजा : सूर्योदय के साथ ही व्रत शुरू हो गया, जो शाम को मां अहोई की कथा के साथ तारों की छांव में खोला गया। यह व्रत अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है। सेक्टर व सोसायटी की महिलाओं ने समूह में एकत्र होकर अहोई माता की पूजा कर उनकी कथा सुनीं। बेटियों के लिए रखा उपवास

बदलती मानसिकता ने कई परंपराओं और मान्यताओं को भी बदला है। एक समय था जब यह व्रत केवल महिलाएं वंश को आगे बढ़ाने वाले बेटों की लंबी उम्र के लिए रखती थीं। समय के साथ लोगों की सोच भी बदली है। अब तमाम महिलाएं अपनी बेटियों के लिए भी यह व्रत रखती हैं। सेक्टर व सोसायटी की कई महिलाओं ने यह व्रत अपनी बेटियों के लिए रखा। अहोई अष्टमी का व्रत अपनी बेटी आराध्या के लिए रखा है। बेटों के लिए तो व्रत सभी रखते हैं, लेकिन बेटी के लिए व्रत रखकर मैं खासा उत्साहित हूं। शाम को कथा सुनने के पश्चात ही व्रत का पारण किया।

-अनिता शर्मा बेटी रक्षिता चार साल की है। पिछले तीन साल से लगातार बिटिया की दीर्घ आयु के लिए व्रत रखती आ रही हूं। बेटों से अधिक बेटियां मां के दिन के करीब होती है। परिवेश बदल चुका है।

-राखी, दनकौर -बेटियां बेटों से किसी भी स्तर पर कम नहीं हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। बेटियां घर की रौनक होती है। बेटों और बेटियों में अंतर नहीं किया जा सकता। मेरे लिए बेटो से बढ़कर मेरी दोनों बेटियां हैं। हर साल उनकी लंबी उम्र की कामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हूं।

- सुचिता जैन, गौर सिटी बेटों और बेटियों में कोई अंतर नहीं है। मेरी बेटी वंसिका राठी के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखा है। एक मां के लिए बेटों और बेटी दोनों बराबर होते हैं। मैं हर साल अपनी बेटी के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हूं।

-पूजा राठी, सिजार सोसायटी

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