पर्यावरण के साथ गोवंश के लिए अभिशाप बनी पालीथिन

जागरण संवाददाता ग्रेटर नोएडा पिछले दिनों जलपुरा गांव की गोशाला में एक दर्जन से अधिक गोवंश की मौत का वीडियो वायरल हुआ। राजनीतिक दल सामाजिक संगठनों के साथ गो प्रेमियों ने जमकर हंगामा काटा। कई दिग्गज नेताओं ने ट्वीट कर नाराजगी जताई।

JagranFri, 02 Apr 2021 05:21 PM (IST)
पर्यावरण के साथ गोवंश के लिए अभिशाप बनी पालीथिन

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा : पिछले दिनों जलपुरा गांव की गोशाला में एक दर्जन से अधिक गोवंश की मौत का वीडियो वायरल हुआ। राजनीतिक दल, सामाजिक संगठनों के साथ गो प्रेमियों ने जमकर हंगामा काटा। कई दिग्गज नेताओं ने ट्वीट कर नाराजगी जताई। मामला तूल पकड़ता देख आलाधिकारियों ने चार लोगों पर कार्रवाई कर इतिश्री कर ली, लेकिन गोवंश बचाने की दिशा में कोई सार्थक पहल शुरू नहीं हो सकी है। शहर में हजारों गोवंश कूड़े के ढेर में अपना निवाला तलाश रहा है। उन्हें बचाने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इसे विडंबना ही कहेंगे कि देवताओं को भी भोग और मोक्ष देने की शक्ति रखने वाला गोवंश आज चारे के अभाव में प्लास्टिक की थैलियों से पेट भरने को मजबूर है। पालीथिन खाने से गोवंश हो रहे बीमार :

प्लास्टिक का कचरा पर्यावरण के साथ गोवंश के लिए अभिशाप बन गया है। फेंकी गई पालीथिन जमीन को बंजर बनाने के साथ गोवंश को बीमार बना रही है। जलपुरा गांव की गोशाला में 200 से अधिक गोवंश संरक्षित है। पशु चिकित्सकों की मानें, तो गोशाला लाई जाने वाली ज्यादातर गाय पालीथिन खाने से बीमार हैं। जांच में गोवंश के पेट में पालीथिन पाए जाने के मामले सामने आए हैं। बच्चों के डाइपर भी गोवंश के लिए अभिशाप बन गए हैं। महिलाएं बच्चों को डाइपर का इस्तेमाल करने के बाद यूं ही फेंक देती है। डाइपर में जमा यूरीन उसमें मौजूद केमिकल की वजह से जैल में परिवर्तित हो जाता है। इसे बेसहारा पशु निगल जाते है। पालीथिन के प्रयोग पर नहीं लग सकी लगाम :

मई 2018 में प्रदेश सरकार ने पालीथिन पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद पुलिस व प्रशासन ने अभियान चलाकर पालीथिन को जब्त भी किया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही अभियान ठंडे बस्ते में चला गया। दुकानों पर पालीथिन का इस्तेमाल धड्ल्ले से हो रहा है।

वर्जन..

लोग बचा हुआ खाना पालीथिन में बांधकर कूड़े पर फेंक देते है। इसे गोवंश पालीथिन समेत निगल जाते हैं। धीरे-धीरे उनके पेट में प्लास्टिक जमा हो जाती है। इससे उनका पाचन तंत्र बिगड़ने लगता है और समय से पहले उनकी मौत हो जाती है।

-डॉ.वीरेंद्र श्रीवास्तव, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी

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