आर्गेनिक खेती की बयार से तरक्की के खुले द्वार

आर्गेनिक खेती की बयार से तरक्की के खुले द्वार

अजब सिंह भाटी ग्रेटर नोएडा एक तरफ जहां कृषि कानून विरोधी किसान दिल्ली की सीमा पर धरना दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ किसान ऐसे भी हैं जो इस कानून के प्रावधानों को पहले ही आत्मसात कर खेती से खुद की तकदीर संवार रहे हैं।

JagranSun, 28 Feb 2021 08:24 PM (IST)

अजब सिंह भाटी, ग्रेटर नोएडा : एक तरफ जहां कृषि कानून विरोधी किसान दिल्ली की सीमा पर धरना दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो इस कानून के प्रावधानों को पहले ही आत्मसात कर खेती से खुद की तकदीर संवार रहे हैं। परंपरागत को छोड़ आधुनिक तकनीक व नई सोच के साथ खेती कर किसानों ने तस्वीर बदल डाली है। नए कृषि कानून में अनुबंध खेती (कांट्रैक्ट फार्मिंग) का भी प्रावधान है। इसके अनुसार किसान अपनी उपज को बेचने के लिए किसी भी कंपनी से अनुबंध कर सकता है। मर्चेंट नेवी के एक पूर्व अधिकारी बिहार निवासी रजनेश चंद्र सिंह नौकरी छोड़कर किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में पिछले दो साल से गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद व बुलंदशहर के कई गांवों में अनुबंध पर खेती करा रहे हैं। उनके समूह में करीब सौ किसान शामिल हैं, जो करीब साढ़े पांच सौ एकड़ जमीन पर आर्गेनिक खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। आर्गेनिक उत्पादों की हो रही होम डिलिवरी

किसानों ने एक कंपनी बनाई है, जो आर्गेनिक सब्जियां जैसे बाकला, पाक चोई, केल, हरा व लाल सलाद पत्ता, चेरी टमाटर, लाल पत्ता गोभी, चाइनीज पत्ता गोभी, फूलगोभी, पीली फूलगोभी के अलावा विभिन्न प्रजाति के खरबूज, तरबूज, दलहन, तिलहन, गेहूं, बासमती चावल, गिलोय व तुलसी की अन्य किसानों से खेती करा रही है। फसल उत्पादन का 20 से 25 फीसद तक अधिक मुनाफा किसानों को मिल रहा है। उत्पाद की होम डिलिवरी के लिए हेल्दी फूड नाम से पोर्टल भी तैयार किया गया है। कोई भी ग्राहक इस पर आनलाइन खरीदारी कर सकता है। इस व्यवस्था से न केवल किसानों की मंडी व बिचौलियों पर निर्भरता खत्म हो गई है, बल्कि करीब 50 अन्य लोगों को रोजगार भी मिला है। वर्जन..

उत्पाद बेचने का अच्छा विकल्प मिला है। पिछले दो साल से कंपनी के साथ मिलकर अनुबंध पर खेती कर रहा हूं। आधुनिक तकनीक से आर्गेनिक सब्जियों की खेती करने से सालाना दो से तीन लाख रुपये की ज्यादा बचत हो रही है।

-सुनील कुमार, किसान

आर्गेनिक सब्जियों का उत्पादन कर रहा हूं। सीधे कंपनी से अनुबंध होने के चलते बिचौलियों और मंडी का शुल्क भी खत्म हो गया है। आर्गेनिक खेती मुनाफे का सौदा साबित हुई है।

-राजेंद्र सिंह, किसान

मैंने नौकरी छोड़कर जमीन किराये पर ली और आर्गेनिक सब्जी की खेती शुरू की। सिकंदराबाद, गौतमबुद्धनगर व गाजियाबाद में खेती कर रहा हूं। अन्य किसानों को भी इससे जोड़ा है। मुनाफा देखते हुए किसान हमारे साथ जुड़ रहे हैं।

-रजनेश चंद्र सिंह, पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी एवं प्रगतिशील किसान

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