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अभियान : पौधे लगाकर आत्मनिर्भर बन रहे लोग

चंद्रशेखर वर्मा, ग्रेटर नोएडा

कई लोगों ने शौकिया तौर पर पौधारोपण किया। इनमें से कई इन पौधों के जरिये आत्मनिर्भर बन रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण दल (पसंद) के संस्थापक टीकम सिंह बताते हैं कि पिछले वर्ष जुलाई में पांच हजार पौधे लगाए थे। इनमें से अभी करीब साढ़े चार हजार पौधे सही हालत में है। वहीं, देहात के क्षेत्र में रह रहे लोगों ने खेत की मेड़ों पर पिछले कई वर्षो के दौरान पौधे लगाए थे। इनमें से कई फल देने लगे हैं, इसके जरिये आमदनी भी हो रही है। उन्होंने बताया कि इस फल, औषधीय व लकड़ी देने वाले पेड़-पौधों से वर्ष भर आमदनी हो सकती है। ऐसे में आत्मनिर्भर शब्द सही मायनों में चरितार्थ हो सकता है।

टीकम सिंह ने बताया कि टीम के सदस्यों के साथ पिछले कई वर्षाें से पौधारोपण कर रहे है। इससे हरनंदी के किनारे होने वाले अतिक्रमण से मुक्ति मिली। वहीं, देहात के लोगों के लिए आय का साधन बना। पौधारोपण करते समय तीन बातों का ध्यान रखते हैं। फलदार, औषधीय व लकड़ी देने वाले पौधों का रोपण करते हैं। प्रेरणा मिली तो किया पौधारोपण

कुलेसरा के रहने वाले राहुल ने बताया कि वह 2018 से अब तक हरनंदी के किनारे 250 पौधे लगा चुके हैं। उनको हरनंदी के तट पर होने वाली गंदगी से पौधे लगाने की प्रेरणा मिली। सिग्मा में रहने वाली नंदनी सक्सेना ने बताया कि बचपन से पेड़-पौधों से लगाव था। पहले घर में ही पौधे लगाने लगी। बाद में आसपास के क्षेत्रों में यह कार्य किया। वह अब तब करीब 500 पौधे लगा चुकी हैं खेत की मेड़ पर फलदार पौधे लगाए थे। इनमें से 200 अमरूद के पौधों में पहली बार फल लगे हैं। वहीं, इस बार तीन क्विंटल आम हुआ है। फल पूरी तरह से जैविक हैं। पचास रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक्री की है।

- अमीपाल सिंह, जलपुरा जिन खेतों में चारदीवारी बनाई गई थी। वहां तीन सौ अमरूद के पौधे लगाए। पहली बार फल लगे हैं। एक पेड़ से करीब 400 रुपये के अमरूद मिलेंगे। अगले वर्ष से आमदनी भी शुरू हो जाएगी।

-सतीश छोकर, जेवर लकड़ी प्राप्त करने के लिए यूकेलिप्टस, सागौन व बांस के करीब 500 पौधे लगाए हैं। आने वाले दस वर्ष में यह पेड़ तैयार हो जाएंगे। एक पेड़ से करीब 25 हजार रुपये की आमदनी होने लगेगी।

- गजेंद्र सिंह, राजपुर कलां

फलदार पौधे : अमरूद, जामुन, आम आदि

औषधीय पौधे : आंवला, अर्जुन, बहेड़ा आदि

लकड़ी देने वाले : यूकेलिप्टस, सागौन, बांस आदि

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