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गांव में बिगड़ रहे हालात, न दवा-न जांच के इंतजाम

गांव में बिगड़ रहे हालात, न दवा-न जांच के इंतजाम

बढ़ते कोरोना संक्रमण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नसीहत और हाईकोर्ट की वाजिब चिता के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। जिले में गांवों में बीमारियों से हालात बिगड़ रहे हैं। गांवों में पांच से दो ग्रामीण बुखार खांसी से पीड़ित हैं। दवाओं और जांच के पूर्ण इंतजाम नहीं हैं। आए दिन ग्रामीणों की मौत हो रही है। ऐसे में यह भी स्पष्ट नहीं हो रहा कि मौत की असल वजह क्या है?

JagranTue, 18 May 2021 11:26 PM (IST)

जेएनएन, मुजफ्फरनगर। बढ़ते कोरोना संक्रमण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नसीहत और हाईकोर्ट की वाजिब चिता के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। जिले में गांवों में बीमारियों से हालात बिगड़ रहे हैं। गांवों में पांच से दो ग्रामीण बुखार, खांसी से पीड़ित हैं। दवाओं और जांच के पूर्ण इंतजाम नहीं हैं। आए दिन ग्रामीणों की मौत हो रही है। ऐसे में यह भी स्पष्ट नहीं हो रहा कि मौत की असल वजह क्या है?

शहर समेत गांव और कस्बों में लोग कोरोना की चपेट में हैं। आए दिन गांवों से दुखद समाचार मिल रहे हैं। हालांकि सरकारी आंकड़ों में गांवों में कुछेक की मौत कोरोना से हो रही है। अब सवाल उठता है कि यदि गांवों में मौत कोरोना से नहीं हो रही हैं तो अधिकतर मौत किस बीमारी से हो रही है? इस पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौन हैं। जब शहर में हालात बिगड़े, तब ग्रामीण अंचल की स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। एक साल पूर्व जब कोरोना ने दस्तक दी थी, तब गांवों में हालात सामान्य थे। अधिकतर संक्रमित और मौत शहरी क्षेत्रों में ही हुई थी, लेकिन दूसरी लहर ने गांवों में तबाही मचा रखी है।

हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने गावों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आइसोलेशन वार्ड जरूर बनवाए हैं, लेकिन वहां पर सुविधाएं नहीं हैं। आक्सीजन सिलेंडर गांवों के आइसोलेशन वार्ड में नहीं हैं। इसके साथ ही पल्स आक्सीमीटर और दवाओं का उचित प्रबंध नहीं है। प्रशासन ने अधिकतर व्यवस्था प्रधानों के भरोसे छोड़ दी है। आइसोलेशन वार्डो में केवल मरीजों के घर से अलग करने के लिए गद्दे डाले गए हैं। वहां मेडिकल टीम और किट का अभाव है।

सात दिन बाद मिल रही जांच रिपोर्ट

ग्रामीण कोरोना संक्रमण की जांच और टीकाकरण के लिए सीएचसी और पीएचसी के चक्कर काट रहे हैं। एंटीजन किट स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त नहीं है, जबकि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट सात दिन बाद मिल रही है। ऐसे में संक्रमित होने पर भी मरीज को स्पष्ट पता नहीं चल पाता है।

इनका कहना है..

गांवों में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व ई-रिक्शा के माध्यम से मेडिकल किट गांवों में भेजी गई। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को गांवों में मरीजों की देखभाल के निर्देश दे रखे हैं।

- सेल्वा कुमारी जे., जिलाधिकारी

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