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जनेऊ धारियों ने गंगा पर किया पितृ ऋषि तर्पण

मुजफ्फरनगर, जेएनएन। पौराणिक तीर्थ नगरी शुकतीर्थ में सोमवार को श्रावणी उपाकर्म महापर्व के मद्देनजर विभिन्न जनपदों से आए सैकड़ों जनेऊ धारियों ने दस विधि से गंगा स्नान किया। जनेऊ धारियों ने भगवान सूर्य नारायण की आराधना कर पितृ और ऋषि तर्पण करते हुए अपने पापों का प्रायश्चित किया।

गंगा घाट पर सोमवार की सुबह ही जनेऊ धारियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। मुजफ्फनगर के अलावा मेरठ, सहारनपुर, शामली आदि जिलों से सैकड़ों जनेऊ धारी द्विज गंगा घाट पर पहुंचे। श्री दंडी आश्रम के आचार्य राजीव लोचन वैदिक एवं आचार्य मोहित वैदिक ने ब्राह्मणों व द्विजों को दस विधि से गंगा स्नान कराया। इसके बाद भगवान सूर्य नारायण की पूजा कर पितृ और ऋषि तर्पण करते हुए उनसे पापों का प्रायश्चित कराया।

श्रावणी उपाकर्म की है प्राचीन परंपरा

आचार्य राजीव लोचन वैदिक ने बतायाकि श्रावणी उपाकर्म ब्राह्मणों व द्विजों का सबसे बड़ा पर्व है। वैदिक काल से द्विज जाति पवित्र नदियों व तीर्थ के तट पर आत्मशुद्धि का यह उत्सव मनाती आ रही है, पर वर्तमान समय में ब्राह्मण व वैदिक श्रावणी की परंपरा को भूलते जा रहे हैं। सावन का महीना रिमझिम फुहारों और हरियाली से मन को आनंदित कर देता है। इसी महीने की पूर्णिमा पर श्रावणी उपाकर्म होता है। गंगा तट पर दस विधि स्नान कर पितरों तथा आत्मकल्याण के लिए मंत्रों के साथ हवन यज्ञ में आहुतियां दी जाती है। इस महत्वपूर्ण दिन पितृ-तर्पण और ऋषि-पूजन या ऋषि तर्पण भी किया जाता है। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद और सहयोग मिलता है जिससे जीवन के हर संकट समाप्त हो जाते हैं।

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