टिपर खरीद घोटाले में पालिकाध्यक्ष और तत्कालीन ईओ दोषी

शहर से कूड़ा उठाने के लिए छोटे वाहन टिपर खरीद में पालिका प्रशासन ने नियमों को ताक पर रख दिया। बगैर वाहन खरीदे संबंधित फर्म को 82 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। जांच अधिकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट और डीएम को जांच रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल समेत तत्कालीन ईओ व संबंधित कर्मचारियों को दोषी माना है। इस मामले में संबंधित पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

JagranMon, 14 Jun 2021 11:48 PM (IST)
टिपर खरीद घोटाले में पालिकाध्यक्ष और तत्कालीन ईओ दोषी

जेएनएन, मुजफ्फरनगर। शहर से कूड़ा उठाने के लिए छोटे वाहन टिपर खरीद में पालिका प्रशासन ने नियमों को ताक पर रख दिया। बगैर वाहन खरीदे संबंधित फर्म को 82 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। जांच अधिकारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट और डीएम को जांच रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल समेत तत्कालीन ईओ व संबंधित कर्मचारियों को दोषी माना है। इस मामले में संबंधित पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

शहर से कूड़ा उठाने के लिए बीते वर्ष नगर पालिका ने 35 टिपर खरीद के लिए टेंडर जारी किए थे। इसके लिए मैसर्स गोल्डन ट्राइंगल सर्विसेज फर्म को टेंडर हुआ था। फर्म की ओर से केवल 11 वाहनों की डिलीवरी की गई, जबकि पालिका प्रशासन ने 82 लाख रुपये का फर्म को भुगतान कर दिया। नियमानुसार और टेंडर की शर्त के आधार पर 35 वाहनों की खरीद सुनिश्चित होने पर यह भुगतान होना था। इस मामले की शिकायत सभासदों ने डीएम और कमिश्नर से की। कमिश्नर ने डीएम को जांच कराने के निर्देश दिए। डीएम ने एसडीएम अशोक कुमार, लोकनिर्माण विभाग के एक्सईएन एसपी सिंह और नगर पालिका के ईओ हेमराज सिंह को जांच दी। तीनों अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट स्थानीय निकाय के प्रभारी अधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट अभिषेक सिंह को सौंपी है। जिसमें टिपर घोटाले में पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल और तत्कालीन ईओ विनयमणि त्रिपाठी समेत विभागीय कर्मचारियों को दोषी माना है। इन पर प्रशासनिक और वित्तीय पद का दुरुपयोग करने का आरोप सिद्ध हुआ है।

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पालिकाध्यक्ष तब थीं कांग्रेस में और अब हैं भाजपाई

नगर पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल ने जिस समय टेंडर कराए और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, तब वह कांग्रेस पार्टी में थी। शिकायत करने वाले सभासद भी भाजपाई हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान और राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी इस मामले में अधिकारियों को जांच कराने को कहा था। इस प्रकरण के बाद अंजू अग्रवाल भाजपा में शामिल हो गई थी।

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टिपर खरीद में किसी प्रकार का गबन नहीं हुआ है। 11 टिपर कोराना काल से पहले आ गए थे। तब शासन से बीएस-4 वाहनों पर रोक लगा दी थी। अब बीएस-6 वाहन फर्म भेज रही है। कमिश्नर की ओर से भी इस बारे में पत्र जारी हुआ है। कोरोना संक्रमण की वजह से वाहन खरीद में देरी हुई।

- अंजू अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष

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जांच रिपोर्ट में पालिकाध्यक्ष और तत्कालीन ईओ को दोषी माना गया है। बगैर वाहन खरीदे भुगतान करना वित्तीय और प्रशासनिक पद का दुरुपयोग है। इस मामले में जल्द ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

अभिषेक सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट।

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