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आइसोलेट को मोरबिड मरीज चिकित्सक से लेते रहें सलाह

आइसोलेट को मोरबिड मरीज चिकित्सक से लेते रहें सलाह

कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। हजारों संक्रमित मरीज घरों पर आइसोलेट होकर ही उपचार करा रहे हैं। इन हालात में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. सत्यम राजवंशी कहते हैं कि आइसोलेशन में उपचार कराने वाले ऐसे मरीजों को चिकित्सकों की विशेष सलाह की आवश्यकता है जो को मोरबिड यानी अन्य गंभीर बीमारियों से पहले ही ग्रस्त हैं। उन्होंने हिदायत दी कि मरीज एकांतवास में इंटरनेट पर देखकर स्वयं कई प्रकार की जांच करा रहे हैं तथा रिपोर्ट का भी स्वयं ही अर्थ लगाकर पेनिक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बिना चिकित्सक की सलाह कोई जांच न कराएं।

JagranMon, 10 May 2021 11:40 PM (IST)

जेएनएन, मुजफ्फरनगर। कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। हजारों संक्रमित मरीज घरों पर आइसोलेट होकर ही उपचार करा रहे हैं। इन हालात में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. सत्यम राजवंशी कहते हैं कि आइसोलेशन में उपचार कराने वाले ऐसे मरीजों को चिकित्सकों की विशेष सलाह की आवश्यकता है जो को मोरबिड यानी अन्य गंभीर बीमारियों से पहले ही ग्रस्त हैं। उन्होंने हिदायत दी कि मरीज एकांतवास में इंटरनेट पर देखकर स्वयं कई प्रकार की जांच करा रहे हैं तथा रिपोर्ट का भी स्वयं ही अर्थ लगाकर पेनिक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बिना चिकित्सक की सलाह कोई जांच न कराएं।

डीएम कार्डियोलोजिस्ट डा. सत्यम राजवंशी का कहना है कि संक्रमण की गति काफी तेज है। इसलिए अब पहले से अधिक सावधानी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि सभी लोग मास्क लगाएं तथा एक-दूसरे से कम से छह फिट की शारीरिक दूरी बनाकर रखें। इसके अलावा बार-बार हाथों को साबुन से धोएं तथा लक्षण नजर आते ही जांच जरूर कराएं। उन्होंने बताया कि जो मरीज घरों पर ही आइसोलेट हैं वे किसी न किसी चिकित्सक से सलाह लेते रहें। कहा कि आम तौर से देखने में आ रहा है कि आइसोलेशन में चल रहे मरीज इंटरनेट पर देखकर ही विभिन्न टेस्ट करा रहे हैं और रिपोर्ट का मतलब निकालकर स्वयं ही पेनिक हो रहे हैं। कहा कि बिना चिकित्सक की सलाह कोई भी जांच कराना ठीक नहीं है। डा. सत्यम राजवंशी ने कहा कि इसके अलावा होम आइसोलेट मरीजों को चाहिए कि वे किसी न किसी चिकित्सक से सलाह लेते रहें। खास तौर से ऐसे संक्रमित जो को मोरबिड यानी पूर्व से किसी गंभीर बीमारी जैसे, मधुमेह, हृदय रोग या फिर गुर्दे संबंधी बीमारी से ग्रस्त हों। कहा कि ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। क्योंकि ऐसे संक्रमित मरीजों की हालत में उतार-चढ़ाव काफी तेजी से होता है। ऐसे किसी भी हालात में संपर्क में चल रहे चिकित्सक मरीज को सही समय पर उचित सलाह देंगे तो स्थिति को समय रहते संभाला जा सकेगा।

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