Vijayadashami 2021 : विजय दशमी को लेकर नगर निगम प्रशासन ने सौंपी जिम्मेदारी, रहेगा बेहतर इंतजाम

Vijayadashami 2021 विजय दशमी को लेकर नगर निगम भी तैयारियों में जुटा रहा। सफाई पानी छिड़काव से लेकर पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदार जिम्मेदारी तय की गई। सफाई निरीक्षक सुनील कुमार गोदाम से सामान उपलब्ध कराएंगे। अन्‍य व्‍यवस्‍थाएं भी बेहतर रहेंगी।

Narendra KumarFri, 15 Oct 2021 10:34 AM (IST)
पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदार जिम्मेदारी तय की गई।

मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। Vijayadashami 2021 : विजय दशमी को लेकर नगर निगम भी तैयारियों में जुटा रहा। सफाई, पानी छिड़काव से लेकर पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदार जिम्मेदारी तय की गई। महापौर विनोद अग्रवाल, अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सिंह, सफाई गोदाम प्रभारी सुनील सिंह के अलावा अन्य सफाई निरीक्षक मौजूद रहे।

रामलीला मैदान के लिए तीन सफाई निरीक्षक सुधांशु कश्यप, उमाकांत शर्मा हिमांशु शर्मा को सफाई की जिम्मेदारी दी गई है। सहायक अभियंता अशोक कुमार को पेयजल व्यवस्था, अवर अभियंता मनीष वैद्य मैदान के गड्ढों समेत अन्य मौजूद रहे। सुनील कुमार सफाई निरीक्षक सुनील कुमार गोदाम से सामान उपलब्ध कराएंगे। पथ प्रकाश, गड्ढे भरने, मोबाइल शौचालय, पानी के टैंकर की व्यवस्था की गई।

शहर की रामलीलाओं में हुए लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ व अहिरावण वध :  शहर में चल रही रामलीला मंचन में अलग-अलग प्रसंग हुआ। दीनदयाल नगर सिविल लाइंस की ओर से की रामलीला में रामेश्वरम की स्थापना की गई। साथ ही भगवान श्री राम ने अंगद को अपना दूत बना कर रावण के दरबार में भेजा, रावण के दरबार में रावण द्वारा अंगद को कैद करने के लिए कहा गया। लेकिन, विभीषण ने बताया कि किसी भी दूत को कैद करना उचित नहीं है, अंगद ने रावण को चुनौती देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति यदि मेरा पैर भी यहां से हिला देगा तो मैं उसके अधीन हो जाऊंगा, रावण के दरबार में उपस्थित कोई भी राजा अंगद का पैर हिला भी नहीं सका, उसके पश्चात युद्ध की घोषणा हुई और युद्ध के मेघनाथ द्वारा छिपकर शक्ति का प्रयोग किया गया, जिससे लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए और हनुमान जी द्वारा सुषेन वैद्य को लाया गया और संजीवनी बूटी हिमालय से लाने के पश्चात लक्ष्मण जी को जीवनदान मिला। लाइनपार की रामलीला में भी मेघनाथ वध और अहिरावण का वध किया गया।इधर, प्राचीन श्री रामलीला कमेटी पुराना दसवां घाट के रामलीला महोत्सव में लक्ष्मण शक्ति और कुंभकरण के वध की लीला का प्रसंग हुआ।

 

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