ज‍िंदा को बताया था मुर्दा, कई घंटे तक शव गृह में रहा मरीज, दो न‍िजी अस्‍पतालों की र‍िपोर्ट का इंतजार

Told dead to Alive Patient ज‍िंदा मरीज को मुर्दा बताकर शव गृह में भेज द‍िया गया था। बाद में मरीज की धड़कन चलने पर अफरातफरी मच गई थी। अब इस मामले में जांच बैठा दी गई है। न‍िजी अस्‍पतालों से इलाज के संबंध में र‍िपोर्ट मांगी गई है।

Narendra KumarPublish:Mon, 29 Nov 2021 02:30 PM (IST) Updated:Mon, 29 Nov 2021 02:30 PM (IST)
ज‍िंदा को बताया था मुर्दा, कई घंटे तक शव गृह में रहा मरीज, दो न‍िजी अस्‍पतालों की र‍िपोर्ट का इंतजार
ज‍िंदा को बताया था मुर्दा, कई घंटे तक शव गृह में रहा मरीज, दो न‍िजी अस्‍पतालों की र‍िपोर्ट का इंतजार

मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। Told dead to Alive Patient : जिंदा इंसान को मृत घोषित करने का मामला फ‍िलहाल अभी ठंडा पड़ने वाला नहीं है। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्‍वास्‍थ्‍य व‍िभाग की ओर से गहनता से जांच की जा रही है। ज‍िला अस्‍पताल से पहले ज‍िन न‍िजी अस्‍पतालों में श्रीकेश का इलाज क‍िया गया था, उनसे इलाज के संबंध में र‍िपोर्ट मांगी गई थी, इनमें ब्राइट स्टार अस्पताल और टीएमयू ने ही जवाब भेजा है जबक‍ि विवेकानंद और साईं अस्पताल ने अभी तक कोई र‍िपोर्ट नहीं भेजी है। इन्‍हें र‍िमाइंडर भेजने की तैयारी है।

बता दें क‍ि कई दिन बीत जाने के बाद भी सिर्फ दो ही अस्पतालों ने जिला अस्पताल कार्यालय को जानकारी उपलब्ध कराई है। श्रीकेश को किस समय अस्पताल लाया गया था और क्या उपचार दिया गया, स्थिति नाजुक होने पर फौरन ही रेफर कर दिया गया था, आदि जानकारी दी गई है। विवेकानंद अस्पताल ने मृत घोषित करने से पहले श्रीकेश की ईसीजी भी की थी। पूरी जांच उसी ईसीजी पर टिकी है। मेडिकल बोर्ड के डाक्टर उस ईसीजी और अपने यहां आपातकालीन चिकित्सक डाॅ. मनोज यादव की बातों का मिलान करेंगे। इसके बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी कि श्रीकेश की उस समय क्या स्थिति रही होगी।

ये था घटनाक्रम : शुक्रवार 19 नवंबर को मुरादाबाद जिला अस्पताल के शवगृह में नगर निगम कर्मचारी श्रीकेश सात घंटे तक पड़ा रहा। आपातकालीन कक्ष चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया था। जिंदा होने की जानकारी मिलने पर उन्हें तत्काल आपातकालीन कक्ष में लाकर उपचार शुरू किया गया। इसकेे बाद मेरठ मेडिकल कालेज में रेफर कर दिया गया था। 24 नवंबर की रात साढ़े छह बजे डाक्टरों की टीम ने श्रीकेश को मृत घोषित कर दिया था। श्रीकेश को समय से उपचार मिल जाता तो शायद दिमाग में खून के थक्के नहीं जमते और वह अपने परिवार के साथ होता। लेकिन, वह निजी और सरकारी लापरवाहियों की भेंट चढ़ गया।

श्रीकेश प्रकरण में विवेकानंद अस्पताल और साईं अस्पताल से सोमवार दोपहर 12: 30 तक कोई जवाब नहीं मिला। यद‍ि शाम तक कोई जवाब नहीं आता है तो एक रिमाइंडर लेटर इन दोनों अस्पतालों को भेजे जाएंगे।

डाॅ. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल