मुरादाबाद में चल रहा फर्जी दस्‍तावेज तैयार कर जमानत लेने का खेल, मुंशी सहित चार गिरफ्तार, थाने की फर्जी मुहर बरामद

Fake Bail Gang Busted पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में कुछ अधिवक्ताओं के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी के साथ ही अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की।

Narendra KumarSat, 23 Oct 2021 08:44 AM (IST)
सिविल लाइंस थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच के संयुक्त टीम ने चार आरोपितों को पकड़ा।

मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। Fake Bail Gang Busted : फर्जी दस्तावेज तैयार करके गैर जनपदों के अपराधियों की जमानत लेने के मामले में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपितों की पास से थानों की तीन मुहर के साथ ही तीन फर्जी आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। पकड़े गए आरोपत जमानत लेने के लिए आठ से 10 हजार रुपये में प्रति व्यक्ति का ठेका लेते थे। पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की।

एसपी सिटी अमित कुमार आनंद ने बताया कि बीते तीन माह से जेल से छूटने वाले अपराधियों और उनके जमानत लेने वालों के सत्यापन किया जा रहा है। इसी दौरान पूर्व में सिविल लाइंस थाने के साथ ही बिलारी और मूढ़ापांड़े थाने में फर्जी जमानत लेने के मामले में तीन मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इन्ही मुकदमों की जांच के दौरान चार आरोपितों के द्वारा फर्जी जमानत लेने के मामले में की जानकारी हुई थी। क्राइम ब्रांच और सिविल लाइंस थाना पुलिस ने छजलैट थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव निवासी राजेश शर्मा को पकड़ा था। आरोपित कचहरी में एक अधिवक्ता के साथ मुंशी का काम करता था। वह कचहरी में घूमकर उन लोगों से बात करता था,जो जनपद के आरोपित होते थे। उनसे बातचीत करने के बाद मुंशी उन्हें स्थानीय स्तर पर जमानत लेने वाले व्यक्तियों को उपलब्ध कराता था। आरोपित एक अपराधी की जमानत लेने के लिए आठ से दस हजार रुपये में डील करता था। आरोपित मुंशी राजेश शर्मा के जमानत के लिए लईक और उसकी पत्नी रोशन जहां निवासी खाईखेड़ा थाना मूढ़ापांड़े व सईद उर्फ अब्दुल निवासी काशीराम नगर कोलानी मझोला से संपर्क करता था। यह चारों लोग मिलकर किसी भी बंदी की जमानत लेने का काम करते थे। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए आरोपित हर बार नाम और पता बदलकर जमानत लेते थे। इन लोगों के दस्तावेज तैयार करने का काम मुंशी ही करता था। इंटरनेट के माध्यम से वह किसी भी व्यक्ति की खतौनी निकाल लेता था, फिर उसी नाम से उसका फर्जी आधार कार्ड तैयार करता था। इन दस्तावेजों को वह सीधे कोर्ट में लगाकर जमानत मंजूर करा लेता था। पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ में कुछ अधिवक्ताओं के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी के साथ ही अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की। इस दौरान एसपी क्राइम अशोक कुमार,सीओ सिविल लाइंस इंदू सिद्धार्थ,सिविल लाइंस थाना प्रभारी रवीन्द्र प्रताप सिंह मौजूद रहे।

थाने तक नहीं पहुंचते थे कागज, खुद लगा देते थे इंस्पेक्टर की फर्जी मुहर : जमानत लेने के मामले में पुलिस ने जिन चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है, वह सभी बड़े शातिर थे। नियमानुसार जमानतियों के प्रपत्र कोर्ट से सीधे थाने में सत्यापन के लिए भेजे जाते हैं। लेकिन पकड़े गए आरोपित दस्तावेजों को थाने पहुंचने ही नहीं देते थे। उससे पहले ही बाबू से तत्काल की बात कहकर प्रपत्रों को लेकर खुद ही थानेदार की मुहर और हस्ताक्षर करके सत्यापित कर देते थे। आरोपितों के पास तीन अलग-अलग थानों की मुहर बरामद हुई हैं। सीओ सिविल लाइंस इंदू सिद्धार्थ ने बताया कि पकड़े गए आरोपित जमानत के अनुसार हर थाने की मुहर बनाकर उनका इस्तेमाल कर लेते थे। जांच में अभी और भी दस्तावेज बरामद किए जाएंगे।

छह साल से फर्जी जमानतियों का चला रहा गैंग : आरोपित मुंशी राजेश शर्मा गैंग बनाकर फर्जी जमानत लेने का काम बीते छह सालों से कर रहा है। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि इन छह सालों में कितने अपराधियों को उसने फर्जी जमानत प्रपत्रों से जेल छुड़वाने का काम किया है। एसपी क्राइम अशोक कुमार ने बताया कि अभी तक की जांच में कुछ लोगों के नाम प्रकाश में आए हैं, जिनको फर्जी दस्तावेजों से जमानत मिली है। इस मामले की अभी जांच की जा रही है। कुछ ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जो कचहरी में घूमकर ऐसे लोगों को फंसाने का काम करते हैं। आरोपित मुंशी भी अधिवक्ता की वेश-भूषा पहनकर लोगों को झांसा देकर फंसा लेता था। पुलिस को अभी तक इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है कि आरोपितों ने कितने लोगों को फर्जी दस्तावेजों से जमानत दिलाने का काम किया है।

जमानत लेने के लिए बदले नाम और पते : पकड़े गए सभी आरोपित जमानत लेने के लिए नाम और पते बदल देते थे। आरोपित सईद उर्फ अब्दुल जमानत लेने के लिए नवाब जान निवासी भगतपुर बनकर जमानत लेता था, जबकि लईक जमानत लेने के लिए असलम निवासी मानपुर थाना भगतपुर व उसकी पत्नी रोशन जहां का फर्जी नाम मेहरूल निशा निवासी मानपुर भगतपुर के पते पर जमानत लेती थी। यह सभी आरोपित भगतपुर का ही क्यों पता और नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे, इस बात की जांच की जा रही है। पुलिस ने पहला मुकदमा भी भगतपुर थाना प्रभारी रहे कोमल सिंह की तहरीर पर ही सिविल लाइंस थाने में दर्ज किया था।

पैरोकार जमानतियों को लेकर अधिवक्ताओं के पास आता है। दस्तावेजों को चेक करने का काम पुलिस का होता है। इस मामले में अधिवक्ताओं की कोई भूमिका नहीं है। कचहरी में फर्जी तरीके से घूमने वाले अधिवक्ताओं को लेकर हम पहले से ही सतर्क हैं। इस संबंध में एक निर्देश भी जारी किया गया था, कि अगर कोई अधिवक्ता नहीं है, तो वह काला कोट और बैज लगाकर नहीं घूम सकता है। अगर ऐसा कोई व्यक्ति हमारे संज्ञान में आता है, तो उसके खिलाफ हम खुद मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई करेंगे।

राकेश कुमार वशिष्ठ, महासचिव, दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी

 

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