मुरादाबाद में प्रशासकों ने खाली कर दिया ग्राम पंचायतों का खजाना, दो दिन में किया चार करोड़ का भुगतान, जानिए कब किया खेल

मुरादाबाद में प्रशासकों ने खाली कर दिया ग्राम पंचायतों का खजाना

प्रशासकों ने चार महीने चौदह दिन में ग्राम पंचायतों के खाते खाली कर दिए। वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में निवर्तमान प्रधानों पर मेहरबानी दिखाते हुए करोड़ों का भुगतान कर दिया। कुंदरकी ब्लाक में ही मार्च के अंतिम दो दिन में चार करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है।

Ravi MishraSun, 09 May 2021 04:30 PM (IST)

मुरादाबाद, जेएनएन। प्रशासकों ने चार महीने चौदह दिन में ग्राम पंचायतों के खाते खाली कर दिए। वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में निवर्तमान प्रधानों पर मेहरबानी दिखाते हुए करोड़ों का भुगतान कर दिया। कुंदरकी ब्लाक में ही मार्च के अंतिम दो दिन में चार करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है। एक-दो को छोड़ दिया जाए तो प्रशासकों ने नए प्रधानों के लिए ग्राम निधि के खातों में कुछ नहीं छोड़ा है। 25 दिसंबर 2020 को प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम पंचायतों की बागडोर प्रशासकों के हाथ में है।

प्रधानी हाथ से जाते समय 584 निवर्तमान प्रधानों ने करो़ड़ों ग्राम पंचायतों के खातों में छोड़ा था। पुराने प्रधानों के कार्यकाल से कुछ भुगतान भी शेष रह गए थे। जैसे ही प्रशासकों के हाथ में ग्राम निधि के खातों की चाबी आई उन्होंने अपने हिसाब से काम करना शुरू कर दिया। निवर्तमान प्रधानों ने शुरूआत में प्रशासकों के पास अपने कार्यकाल का रुका हुआ भुगतान कराने के लिए चक्कर लगाए। लेकिन, वह सुनने को तैयार नहीं थे।

मार्च के महीने में प्रशासकों ने खुद ही निवर्तमान प्रधानों को बुलाकर भुगतान का रास्ता निकाल लिया। इसके बाद ग्राम निधियों से भुगतान होने शुरू हो गए। कुंदरकी ब्लाक में मार्च के महीने में दो दिन में चार करोड़ से भी अधिक का भुगतान हुआ। यही हाल विकास खंड, डिलारी, ठाकुरद्वारा, भगतपुर टांडा, छजलैट, मूंढापांडे की ग्राम पंचायतों का रहा। प्रशासकों ने करोड़ों की भुगतान करके ग्राम निधियों के खाते खाली कर दिए।

नई ग्राम प्रधानों को अभी तक बस्ता ही नहीं मिला है। मिलेगा भी ग्राम निधि में कुछ नहीं मिलना है। प्रशासकों ने ग्राम निधि की धनराशि को प्रधानों से भी तेज गति से खर्च कर दिया है। अब नई किस्त आने पर भी ग्राम पंचायतों के विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल तो प्रधानों को खाली हाथ ही बैठना होगा। जिला पंचायत राज अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासकों ने पारदर्शिता से काम किया है।

गलत तरीके से भुगतान किए होंगे तो शिकायत आने पर जांच कराकर कार्रवाई होगी। पुराने प्रधानों से लिया जाएगा हिसाब-पुराने प्रधानों से हिसाब लेने के लिए भी प्रक्रिया शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा वह प्रधान निशाने पर हैं, जिन्होंने धनराशि मिलने के बाद भी पंचायत भवन का निर्माण नहीं कराया। कई गांव तो ऐसे हैं, जिनमें पंचायत भवन के लिए धनराशि पूरी मिल गई थी। लेकिन, प्रधान और उसके परिवार के लोग धनराशि खाते से निकालकर हड़प गए।

इसके चलते पंचायत घर की बुनियाद ही भरकर रह गई है। शौचालय के निर्माण में भी कई पुराने प्रधानों ने गोलमाल किया है। ऐसे पुराने प्रधानों का आडिट में फंसना तय माना जा रहा है। 

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