Swachh Bharat Mission : मुरादाबाद के चिकित्सा अधीक्षक की निगरानी से बदली सफाई व्यवस्था की तस्वीर

Swachh Bharat Mission : मुरादाबाद के चिकित्सा अधीक्षक की निगरानी से बदली सफाई व्यवस्था की तस्वीर

चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेंद्र कुमार सुबह से शाम तक खुद करते हैं निगरानी। कर्मचारियों से कराते हैं हर वार्ड की सफाई कंपाउंड में भी कराते हैं व्यवस्था।

Publish Date:Sat, 15 Aug 2020 06:34 PM (IST) Author: Narendra Kumar

मुरादाबाद।  स्वच्छता के लिए अस्पताल का हर एक कर्मचारी सजग है लेकिन, जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेंद्र कुमार सफाई व्यवस्था को लेकर पूरे अस्पताल का निरीक्षण सफाई कर्मचारियों को लेकर करते हैं। अस्पताल के वार्डों में सफाई व्यवस्था को लेकर मरीजों से भी पूछताछ करते हैं। अब ये आलम है कि अस्पताल में गंदगी नजर नहीं आती है।

चिकित्सा अधीक्षक की दिनचर्या सुबह सात बजे से शुरू हो जाती है। सफाई कर्मचारी भी अलर्ट मिलते हैं। वो अस्पताल इमरजेंसी गैलरी देखने के साथ ही शौचायल आदि का निरीक्षण करते हैं। सुपरवाइजर मुहम्मद इमरान कर्मचारियों के साथ मौजूद रहते हैं। हाथों हाथ ही सभी जगह की सफाई होने के साथ ही बैक्टीरिया मारने के लिए दवा का छिड़काव भी अपने सामने कराते हैं। पार्क, ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी, इमरजेंसी वार्ड की सफाई कराते हैं। उनकी मौजूदगी की वजह से कर्मचारी काम में कोताही नहीं बरतते हैं। सुबह के बाद दोपहर दो बजे के करीब फिर वो अस्पताल के पार्क और छत की सफाई दूसरी शिफ्ट के कर्मचारियों से कराते हैं। शाम को सात बजे के करीब वो सफाई व्यवस्था के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं। सुबह, दोपहर और शाम की शिफ्ट में 35 कर्मचारी काम करते हैं। इस वजह से कोई कर्मचारी लापरवाही नहीं बरतता है। अस्पताल की जिम्मेदारियों के अलावा उनका ये काम अस्पताल और मरीजों की सेहत के लिए है। उनका प्रयास रहता है कि अस्पताल में कहीं भी गंदगी न हो। कोरोना काल में तो सफाई कर्मचारियों को विशेष निर्देश दिए हुए हैं। बार-बार दवा का छिड़काव कराया जा रहा है, जिससे इंफेक्शन नहीं फैले। 

मरीजों से लिया जा रहा फीडबैक

सरकारी अस्पताल में सफाई व्यवस्था खराब होने की शिकायतें हर दिन होती थी। कर्मचारियों की भी संख्या कम रहती थी लेकिन, डॉ राजेंद्र कुमार की निगरानी की वजह कर्मचारियों की संख्या तय मानकों के अनुसार है तो हर वार्ड में कर्मचारी झाड़ूू लगाने के बाद दवा का छिड़काव करते हैं। सके बाद वो मरीजों से खुद फीडबैक लेते हैं। शिकायत मिलने पर उस कर्मचारी को वहीं बुलाया जाता है। 

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