इंटरनेट मीडिया पर खुल रही सपा के दगाबाजों की पोल, कहा-हमें अपने बच्चे नहीं पालने हैं क्या, कमीशन चाह‍िए

जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं में आपसी दूरियां बढ़ती ही जा रहीं हैं। सपा नेता इंटरनेट पर एक-दूसरे का वीडियो वायरल करके पार्टी की फजीहत कराने में कोई कसर बाकी नहीं छो़ड़ रहे हैं।

Narendra KumarMon, 19 Jul 2021 03:36 PM (IST)
छानबीन के दौरान पता लगा कि वह भी सत्ताधारी दल के साथ ही था।

मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं में आपसी दूरियां बढ़ती ही जा रहीं हैं। सपा नेता इंटरनेट पर एक-दूसरे का वीडियो वायरल करके पार्टी की फजीहत कराने में कोई कसर बाकी नहीं छो़ड़ रहे हैं। अब एक ऐसे युवा नेता का भी वीडियो सामने आया है, जो नामांकन के दिन पार्टी कार्यालय में बैठा रहा। लेकिन, छानबीन के दौरान पता लगा कि वह भी सत्ताधारी दल के साथ ही था।

नामांकन के दिन पार्टी से हमदर्दी जताने वाले इस नेता की इंटरनेट पर अपने साथियों के साथ बुलंदशहर के एक रिसोर्ट की वीडियो सामने आई है। रिसोर्ट में वह कुंदरकी विधानसभा के एक जिला पंचायत सदस्य और बिलारी के यदुवंशी नेता के साथ बैठे हुए नजर आ रहे हैं। विरोधी इस वीडियो पर दगाबाज होने का कमेंट कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिकने वालों में इनका नाम भी शामिल हैं। पुराने रिश्तों का हवाला देकर जिताने का वादा किया था। दूसरा साथी खुद को जिले की प्रथम नागरिक के गांव का बताकर रिसोर्ट में मस्ती कर रहा था। इसके अलावा भी कई वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं। इसमें सपा के नेता ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए लगे हुए हैं। इससे पार्टी की जमकर फजीहत हो रही है। इससे मतदाता भी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। जिनका विरोध करके वोट मांगे गए, अब वही नेता उन्हीं के साथ खड़े हो गए हैं।

25 लाख खर्च किए हैं, जो जीतेगा उसके साथ रहेंगे : सपा के एक यदुवंशी नेता और उन्हीं के पार्टी के अधिवक्ता के बीच बातचीत का आडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है। आडियो में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर बात हो रही है। यदुवंशी का कहना है कि 25 लाख रुपये खर्च करके चुनाव जीता है। हमें बर्बाद नहीं होना है, जो जीतेगा हम उसे साथ रहेंगे।

यदुवंशी : कहां हो अध्यक्ष जी. अध्यक्ष कहूं या वकील साहब कहूं।

अधिवक्ता : मैं बड़ा भाई कहूं, समाजवादी पार्टी का सिपाही कहूं या आपको योगी, मोदी सेना का सदस्य कहूं। यदुवंशी : हमें योगी, मोदी किसी भी सेना का सदस्य कह लो। तुमको जिला पंचायत के चुनाव के बारे में पता है। विधायक विरोधियों से सौदा कर रहा है।

अधिवक्ता : हमें तुम्हारे बारे में पता है कि कोई कहीं चला जाए। लेकिन, तुम कहीं न जा सकते थे। तुम किस-किस के साथ घूम रहे हो। पार्टी को इस समय आपकी जरूरत है।

यदुवंशी : विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत करेंगे। हमें अपने बच्चे नहीं पालने हैं क्या? पूरे पांच साल का इंतजाम करना है। अपने काम कराने हैं, कमीशन चाहिए।

अधिवक्ता : बच्चे तो मेरे भी हैं। मैं नहीं पाल रहा हूं क्या। अपनी पार्टी के साथ रहना चाहिए।

यदुवंशी : जब मैं तेरे लिए मुंह नहीं खोलता हूं तो तूने मुंह क्यों खोला है। विधायक के कहने पर बुराई क्यों कर रहा है। हमारे जीतने वाले प्रत्याशी से पारिवारिक संबंध हैं। हम उसी के साथ रहेंगे।

अधिवक्ता : पार्टी सत्ता में आए न आए। मैं बेबाक बाेलता रहूंगा।

यदुवंशी: मैं तुझको दस लाख दूंगा, जिताकर दिखाओ किसी को भी। न जीता तो पचास लाख लूंगा।

अधिवक्ता : मैंने आपको अपना आदेश माना था। आपने पार्टी के साथ अच्छा नहीं किया।

यदुवंशी : मैं कभी तुम्हारे रास्ते में कभी खड़ा नहीं हुआ। तुम भी मुझसे संबंध रखना चाहते हो तो मुंह बंद रखना।

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