Sentenced in Two Girls Murder : दिल्ली के निर्भया कांड में सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बना सजा का आधार

Sentenced in Two Girls Murder चार साल तक चली सुनवाई के बाद तीन जून 2014 को राजेश और राकेश को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत से उम्रकैद की सजा होने के बाद जेल प्रशासन ने दोनों को 24 सितंबर 2014 को आगरा सेंट्रल जेल भेज दिया था।

Narendra KumarTue, 21 Sep 2021 01:11 PM (IST)
सुनवाई के बाद अदालत ने 26 पेज के फैसले में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया।

मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। अनुसूचित जात‍ि की दो किशोरियों की हत्‍या के मामले में एससी-एसटी कोर्ट ने सात आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सुनवाई पूरी होने बाद अदालत ने 26 पेज के फैसले में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले का जिक्र किया। दिल्ली के निर्भया हत्याकांड के फैसले का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उदाहरण पेश करता है कि जिस अपराध से पीड़ित पक्ष के मन और समाज पर गलत दुष्प्रभाव पड़ता है, ऐसे मामलों में अदालत को उदारता न दिखाते हुए सख्त सजा देनी चाहिए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुधीर गुप्ता ने सजा पहले जिरह करते हुए आरोपितों की उम्र ज्यादा होने का हवाला देते हुए उन्हें सजा कम दिए जाने की अपील की थी। लेकिन, कोर्ट ने आरोपित पक्ष के अधिवक्ता की किसी दलील को नहीं माना। इस मामले में कोर्ट ने सभी सात आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ ही जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया।

कोर्ट की कार्रवाई से दूर रही मृतक बेटियों की मां : दो बेटियों की जलने से मौत के बाद राजो वाल्मीकि ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने घटना के दो दिन बाद मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की थी। कोर्ट में राजो अपने बयान दर्ज कराने के बाद फिर पैरवी करने के लिए नहीं आईं। इस मामले में सरकारी अधिवक्ता की ओर से पैरवी करने के साथ ही सजा दिलाने की कार्रवाई की गई। बेटियों की मृत्यु और उससे पहले हत्या के आरोप में बेटों के जेल जाने के बाद राजो पूरी तरह से टूट चुकी थीं। कोठीवाल नगर के जिस आवास में वह रहती थी, उस आवास को भी वह बेचकर कहीं चली गई थीं। वह कहां रह रही हैं, इसके बारे में आसपास के लोगों को भी नहीं पता है।

19 गवाहों ने अदालत में दर्ज कराए थे बयान : इस मामले में अदालत में 19 गवाहों के द्वारा बयान दर्ज कराए गए थे। जिसमें पुलिस, डाक्टर के साथ ही मौके पर मौजूद लोगों ने गवाही देने के लिए गए थे। मृतका की मां ने भी बयान दर्ज कराए थे। जिसमें उन्होंने अभद्रता करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मिट्टी का तेल डालकर आग लगाने का आरोप लगाया था। मां की ओर से दी गई इस गवाही को भी अदालत ने अहम माना।

बेटियों की मौत के बाद आरोपित बेटों को मिली उम्रकैद की सजा : राजो वाल्मीकि के दो बेटों राजेश और राकेश ने पहले पंकज गगनेजा के घर में लूट और हत्या की घटना को अंजाम दिया था। इसी मामले को लेकर पंजाबी समाज के लोगों के द्वारा आरोपितों के घर के सामने प्रदर्शन किया था। पुलिस ने इस मामले में राजो के दोनों बेटों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 

सात आरोपितों को उम्रकैद होने के बाद मुहल्ले में छाया मातम : दो किशोरियों को आत्महत्या के लिए दबाव बनाने के मामले में कोठीवाल नगर निवासी सात आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इस मामले की सूचना जैसे ही कोठीवाल नगर के निवासियों और आरोपितों के स्वजन को लगी पूरे मुहल्ले में सन्नाटा पसर गया। आरोपितों के घरों में सांत्वना देने वालों की कतारें लगी रही। किसी को यह विश्वास नहीं हो रहा कि इस मामले में सात आरोपितों को उम्रकैद की सजा हुई है।

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