Sanitation Survey 2021 : मुरादाबाद में घनी आबादी से बाहर होंगी पीतल की भट्ठियां

नगर निगम ने एरिया बेस्ड डवलपमेंट योजना में शाम‍िल क‍िया है।

Moradabad Municipal Corporation शहर में जहर उगल रही भट्ठियों से जनता को निजात दिलाने के लिए नगर निगम को औद्योगिक क्षेत्र दिल्ली रोड पर पुनर्वास करेगा। दस्तकारों के लिए पीतल का कारोबार करने के लिए क्लस्टर बनाया जाएगा।

Narendra KumarThu, 25 Feb 2021 04:52 PM (IST)

मुरादाबाद, जेएनएन। स्मार्ट सिटी में घनी आबादी के बीच से 3000 से अधिक पीतल की भट्ठियां शहर से बाहर होंगी। उनको स्मार्ट सिटी में विस्थापित करने के लिए नगर निगम ने एरिया बेस्ड डवलपमेंट योजना में शाम‍िल क‍िया है। 

शहर में जहर उगल रही भट्ठियों से जनता को निजात दिलाने के लिए नगर निगम को औद्योगिक क्षेत्र दिल्ली रोड पर पुनर्वास करेगा। दस्तकारों के लिए पीतल का कारोबार करने के लिए क्लस्टर बनाया जाएगा। इसमें शहर के दस्तकार वैज्ञानिक विधि से पीतल की सिल्ली को गलाने से लेकर ढलाई, कोटिंग, पॉलिशिंग, छिलाई, ढलाई व अन्य काम कर सकेंगे। इसके लिए गैस की पाइप लाइन दस्तकारों के क्लस्टर जोन तक पहुंचाई जाएगी। जिससे धुएं से दस्तकारों को भी निजात मिलेगी। इस संबंध में नगर निगम शिविर कार्यालय में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी), नगर निगम अफसरों, दस्तकारों, पुलिस, प्रशासन व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। नगर आयुक्त व सीईओ संजय चौहान ने स्मार्ट सिटी में एरिया बेस्ड डेवलपमेंट योजना के तहत दस्तकारों को शहर से बाहर औद्योगिक क्षेत्र में विस्थापित करने की योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि एनजीटी के आदेश व स्मार्ट सिटी में शहर के लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए पीतल की भट्ठियों को औद्योगिक क्षेत्र में विस्थापित किया जाएगा। इस पर दस्तकार गानिम मियां ने कहा कि जिस क्षेत्र में पहले से दस्तकारी का काम हो रहा है, उसी के आसपास जगह तलाश करके क्लस्टर बनाया जाए। उन्होंने उदाहरण दिया कि बरवालान के दस्तकारों को रामगंगा किनारे जहां हाल ही में जगह खाली कराई गई है, वहीं पर स्मार्ट सिटी के तहत वैज्ञानिक तरीके से दस्तकारी करने को जगह व संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इस पर नगर आयुक्त सहमत नहीं हुए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में दस्तकारी का काम करने से आसान होगा व शहर प्रदूषण मुक्त होगा। एसपी सिटी अमित पाठक ने कहा कि प्रदूषण को लेकर मुरादाबाद देश भर में बदनाम है। इसके लिए जरूरी है शहर से बाहर वैज्ञानिक तरीके से दस्तकारी का काम हो। स्मार्ट सिटी योजना में दस्तकारों को सहयोग करना चाहिए। सिटी मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह ने भी औद्योगिक क्षेत्र में क्लस्टर बनाकर कारोबार करने का निर्णय सही बताया। 

प्रदूषण से अस्थमा मरीजों को अधिक नुकसान

शहरी क्षेत्र में भट्ठियों की वजह से लोगों का जीना दुश्वार है। जिला अस्पताल पहुंचने वाले ज्यादातर अस्थमा रोगी पुराने शहर के होते हैं। चेस्ट फिजिशियन डॉ. प्रवीण शाह ने बताया कि प्रदूषण की वजह से फेफड़ों की परेशानी शुरू हो जाती है। अस्थमा रोग की चपेट में आ जाते हैं। प्रदूषण का सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। इस वजह से रात के समय में उन्हें सांस लेने में भी परेशानी हाेती है। अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 60 मरीज अस्थमा और फेफड़ों की समस्या के आ रहे हैं। शहरी क्षेत्र की हवा का प्रदूषण खत्म होने से ही इस तरह की बीमारियां कम होंगी। इसके अलावा धातुओं को गलाने से महीन कण हवा में घुलने से कैंसर का भी खतरा बना रहता है।

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