मुरादाबाद में पांच सौ से अधिक शौचालयों के न‍िर्माण में धांधली, तीन सौ करोड़ रुपये का हो चुका भुगतान

स्वच्छ भारत अभियान के तहत जनपद में जमकर मनमानी हुई। शौचालय निर्माण में मनमानी धांधली और घोटाले के बाद अब सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में भी फर्जीवाड़े सामने आने शुरू हो गए हैं। एक तिहाई से अधिक में काम अधूरा पड़ा है जबकि भुगतान पूरा कर दिया गया है।

Narendra KumarWed, 28 Jul 2021 12:57 PM (IST)
सामुदायिक शौचालय - 300 करोड़ से अधिक का इनके लिए किया गया है भुगतान।

मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। स्वच्छ भारत अभियान के तहत जनपद में जमकर मनमानी हुई। शौचालय निर्माण में मनमानी, धांधली और घोटाले के बाद अब सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में भी फर्जीवाड़े सामने आने शुरू हो गए हैं। मुरादाबाद के 500 से अधिक गांवों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों में गड़बड़ियों की शिकायतें शुरू हो गई हैं। निर्मित हो चुके 500 से अधिक शौचालयों में से एक तिहाई से अधिक में काम अधूरा पड़ा है, जबकि भुगतान पूरा कर दिया गया है।

जनपद में करीब तीन सौ करोड़ रुपये का भुगतान इन सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के लिए किया गया है। तीन सौ करोड़ से अधिक के भुगतान करने के बावजूद शौचालय आधे अधूरे पड़े हैं। कई जगह निर्धारित लागत का 50 से 60 फीसद तक ही खर्च किया गया है। आने वाली धनराशि का दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाए अफसर बचाने में जुट जाते हैं। चार महीने में प्रशासकों ने ग्राम पंचायतों के धन को खातों से निकालकर खूब मनमानी की है। विकास खंड बिलारी के नसीरपुर गांव में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। इससे पहले ही देखरेख करने वाले स्वयं सहायता समूह को भुगतान कर दिया गया। यह कोई नई बात नहीं है। ऐसा जिले के और भी गांवों में हुआ है, लेकिन जांच कराने वाले अफसर भी कहीं न कहीं इस गोलमाल से जुड़े हैं।केस वन : ब्लाक बिलारी के नसीरपुर गांव में शौचालय अभी पूरा बनकर तैयार नहीं हुआ है। इसकी देखरेख के लिए समूह का चयन हो चुका है। नियम यह है कि शौचालय की जियो टैगिंग के बिना इसकी देखरेख का काम शुरू नहीं होगा। इसके बाद ही शौचालय को स्वयं सहायता समूह को सौंपा जाएगा। जियो टैगिंग के बाद ही समूह को देखरेख के लिए मिलने वाली धनराशि का भुगतान होना है, लेकिन वहां मनमानी करते हुए समूह को भुगतान पहले ही कर दिया गया। ग्राम पंचायतों में बनने वाले सार्वजनिक शौचालयों में अव्वल ईंट के स्थान पर पीली लगाई जा रही हैं। शौचालयों के निर्माण के लिए प्रशासकों के कार्यकाल में सबसे ज्यादा धनराशि निकाली गई। जांच में पीला ईंट लगाए जाने के लिए कई गांवों को नोटिस भी भेजा गया है। कुंदरकी विकास खंड में वित्तीय वर्ष के अंत के दिनों में रोजाना लाखों रुपये ग्राम निधि से निकाले गए। इसी तरह डिलारी और बिलारी में ग्राम निधि से मोटी धनराशि निकाली है।

मानकों के अनुरूप नहीं लगाई गई सामग्री : शौचालयों के निर्माण के लेकर जो शिकायतें आ रही है, उसमें मानक के अनुरूप कार्य करने को लेकर है। पिछले दिनों रौंडा झौंडा गांव में निर्माण के कुछ दिन बाद ही सामुदायिक शौचालय की छत टपकने लगी थी। इसी प्रकार अन्य जगहों पर शौचालयों में लगाई जाने वाली फ्लैश और शीट भी लोकल खरीद कर लगाई गई। कई शौचालयों में वाश बेसिन लगाए ही नहीं गए हैं। अगर लगे हैं तो वह निर्धारित कंपनी के बजाय घटिया स्तर के लगाए गए हैं।

घपले की जांच शुरू, कार्रवाई होनी तय : डिलारी विकास खंड ग्राम पंचायत फरीदपुर भैंडी के ग्रामीणों ने पूर्व प्रधान एवं सचिव पर स्वच्छ भारत मिशन की धनराशि का दुरुपयोग करने के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। इस मामले में कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है। जालम सिंह, साधू सिंह, महेंद्र सिंह, बलवीर सिंह, रविकुमार, राजपाल, नीरज, प्रशांत शर्मा, अतर सिंह आदि ने डीएम से शिकायत करके बताया कि शौचालय निर्माण के लिए लाभार्थियों को नियमानुसार धनराशि आहरित नहीं की गई। लाभार्थियों के खाते में शौचालयों की धनराशि स्थानांतरित करने में भी खेल हुआ। पांच से सात हजार रुपये तक की धनराशि ही लाभार्थियों को मिली है। बारह हजार में से बाकी धनराशि धमकाकर वापस ले ली गई है। धनराशि कम मिलने की वजह से लाभार्थियों के शौचालय पूरी तरह से बन नहीं सके हैं। इस मामले में जांच शुरू हो चुकी है। मामले में कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है।

डीपीआरओ के तबादले के बाद मुझे चार्ज मिला है। इसलिए यह प्रकरण मेरी जानकारी में नहीं आया है। इन प्रकरणों के बारे में पता कराकर आगे की कार्रवाई कराई जाएगी।

- सुनील कुमार सिंह, प्रभारी डीपीआरओ

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