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अजब-गजब: रामपुर के शाहाबाद में पेड़ से होने लगी रुपयों की बरसात, बटोरने के बाद पछताए लोग

दर आ गया और गाड़ी से पर्स लेकर सामने वाले पेड़ पर चढ़ गया

रामपुर के शाहाबाद में पेड़ से अचानक ही पांच सौ दो सौ सौ और पचास रुपए के नोट गिरने लगे। नोट की बरसात में नहाने को हर कोई आतुर था लेकिन जब उन्होंने रुपया बटोर लिया तो माजरा कुछ और ही निकला।

Dharmendra PandeySun, 16 May 2021 11:17 AM (IST)

मुरादाबाद, जेएनएन। कोरोना वायरस के संक्रमण काल में प्रदेश में कोरोना कफ्र्यू लागू होने के कारण बेहद जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में अगर पेड़ से रुपयों की बरसात होने लगे तो ही आदमी इसका लाभ लेने को आतुर रहेगा। ऐसा ही कुछ रामपुर के शाहाबाद में हुआ। पेड़ से अचानक ही पांच सौ, दो सौ, सौ और पचास रुपए के नोट गिरने लगे। नोट की बरसात में नहाने को हर कोई आतुर था, लेकिन जब उन्होंने रुपया बटोर लिया तो माजरा कुछ और ही निकला। बेहद मायूस होकर इन सभी ने हकदार को रुपए लौटा दिए।

उत्तर प्रदेश का रामपुर जिला रजा लाइब्ररी और रामपुर के नवाबी खानदान के साथ ही आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर बेहद चर्चा में रहता है, लेकिन यहां का शाहाबाद कस्बा रुपयों की बरसात के कारण सुर्खियों में आ गया। यहां पर एक पेड़ से शनिवार की शाम को रुपयों की बरसात होने लगी। लोगों को रामपुर में रुपयों का पेड़ मिल गया। पेड़ से अचानक बरसते देख नीचे खड़े लोगों ने उन्हेंं बटोरना शुरू कर दिया। रुपयों को पेड़ से गिरते देख लोगों ने उनको बटोरा और भागने लगे। इसके कुछ देर बाद ही इन सभी को रुपयों को लौटाना पड़ गया।

रामपुर के शाहाबाद में डायल-112 में तैनात एक पुलिस कर्मी का पर्स लेकर बंदर भाग गया। इसके बाद वह पेड़ पर चढ़ गया। बंदर ने पर्स खोला ओर उसमें रखे नोट बरसाने लगा। इसके बाद तो वहां मौजूद लोगों ने पेड़ से गिरते नोट को बटोर लिया। बाद में सभी लोगों ने पुलिस कर्मी के सभी नोट उन्हेंं वापस भी कर दिए।

शाहबाद एक ग्रामीण इलाका है। यहां पर बंदरों की तादाद भी बहुत अधिक है। कोतवाली में पीआरवी डायल 112 गाड़ी पर तैनात पुलिस कर्मी कुलदीप सिंह का पर्स कोतवाली गेट पर खड़ी गाड़ी में रखा हुआ था। गाड़ी खड़ी कर कुलदीप सिंह कोतवाली मेस में भोजन करने गए। गाड़ी का शीशा खुला रह गया था। इसी दौरान कहीं से बंदर आ गया और गाड़ी से पर्स लेकर सामने वाले पेड़ पर चढ़ गया। बंदर ने उसे जब पर्स खोलने का प्रयास किया तो उसमें रखे नोट नीचे गिरने लगे। पेड़ से नोट गिरते देख नीचे खड़े लोगों ने उन्हेंं बटोरना शुरू कर दिया। इसी दौरान पर्स के कुछ कागज भी गिरे। इसी दौरान कुलदीप कुमार का आईकार्ड नीचे गिरा तो लोगों को मामले की जानकारी हुई। इन कागजों से लोगों को पता चला कि इस पर्स का मालिक कौन है और सभी ने पैसे और कागज इकट्ठा कर पुलिस को सौंपे।

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