Railway Bonsai Plantman : यू-ट्यूब ने रेलवे गार्ड को बना दिया बोनसाई पौधामैन, 10 साल में 70 से अधिक पौधे क‍िए तैयार

Railway Bonsai Plantman मुरादाबाद में रेलवे गार्ड न‍िजाम पौधे की देखभाल के लिए प्रत्येक माह वेतन से 10 हजार रुपये खर्च करते हैं। इसके अलावा वह आसपास के लोगों को पेड़ पौधा लगाने के लिए प्रेरित करते हैं।

Narendra KumarFri, 24 Sep 2021 09:26 AM (IST)
पर्यावरण से जुड़ने के लिए यू ट्यूब देखना शुरू क‍िया।

मुरादाबाद [प्रदीप चौरस‍िया]। रेलवे की नौकरी के बाद खेलने का मौका नहीं मिला तो निजाम ने पर्यावरण से जुड़ने के लिए यू ट्यूब देखना शुरू कर दिया और बोनसाई पौधामैन बन गया। 10 साल में 70 से अधिक बोनसाई पौधा तैयार कर चुके हैं। इतना ही नहीं लोगों को कलम कर पौधा तैयार कर वितरण भी करते हैं। 

निजाम को बचपन से ही क्रिकेट खोलने का शौक था, उसके जुनून ने उसे राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बना दिया। वर्ष 2003 में सीनियर कूच बिहार ट्राॅफी खेला। आफर मिलने पर निजाम ने 2005 रेलवे में नौकरी शुरू कर दी। शुरुआत में रेलवे प्रशासन ने निजाम को क्रिकेट खेलने का मौका दिया, उसके बाद तो ड्यूटी करानी शुरू कर दी। समय नहीं मिलने से निजाम का खेलना बंद हो गया। इसके बाद निजाम खिन्न रहने लगे। इसके बाद पर्यावरण से जुड़ने के लिए यू ट्यूब देखना शुरू क‍िया। यू ट्यूब से पेड़ पौधे की जानकारी एकत्रित की और पौधे के बारे में पढ़ना शुरू कर दिया। निजाम की रुच‍ि बोनसाई पौधे की और बढ़ी। इसके बाद बोनसाई पौधा तैयार करना शुरू कर दिया। पेड़ पौधा लगाने के लिए रेल प्रशासन से अनुरोध कर क्वार्टर आवंटित करा लिया। लाइनपार स्थिति क्वार्टर को हरा भरना करना शुरू कर दिया। रेलवे में गार्ड की नौकरी करने वाले निजाम ने 10  साल में 70 से अधिक बोनसाई पौधा तैयार किया है। इसमें आम, लीची, अमरुद, बादाम, बरगद, जैसे बोनसाई पौधे शामिल है। इसके अलावा क्वार्टर की खाली जमीन पर फूल के साथ कई प्रकार के पौधे लगाए। ड्यूटी से आने के बाद सबसे पहले पौधे की देखभाल करते हैं। उसके बाद खाना खाते हैं। पौधे की देखभाल के लिए प्रत्येक माह वेतन से 10 हजार रुपये खर्च करते हैं। आसपास के लोगों को पेड़ पौधा लगाने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके अलावा पेड़ व पौधे की कलम तैयार करते हैं और लोगों फ्री में पौधा वितरण करते हैं। निजाम कहते हैं क‍ि गार्ड की नौकरी कठिन है। घर के निकलने के बाद कई बार 24 घंटे के बाद लौटते हैं, कोई पौधा सूख नहीं जाए, इसका इंतजाम करते हैं, तभी ड्यूटी पर जाते हैं। ड्यूटी आने पर पौधे की देखभाल करते हैं।

 

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