बचपन को जकड़ रही पचपन वाली बीमारी, बच्चों में तेजी से बढ़ रही टीबी की बीमारी, जानें क्या है वजह

How to prevent TB पचपन साल की उम्र में होने वाली बीमारियां अब बचपन को जकड़ रही हैं। उत्तर प्रदेश के जनपद अमरोहा के गजरौला में सैकड़ों बच्चे ऐसे हैं जो टीबी की बीमारी से ग्रस्त और उससे लड़कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।

Samanvay PandeySun, 17 Oct 2021 06:10 AM (IST)
नौनिहालों में भी तेजी के साथ बढ़ रहा टीबी का ग्राफ, स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ी

मुरादाबाद, (सौरव प्रजापति)। How to prevent TB : पचपन साल की उम्र में होने वाली बीमारियां अब बचपन को जकड़ रही हैं। इससे न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ी हैं बल्कि अभिभावक भी परेशान हैं। औद्योगिक नगरी में सैकड़ों बच्चे ऐसे हैं जो टीबी की बीमारी से ग्रस्त और उससे लड़कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। दरअसल क्षय रोग (टीबी) अभी तक उम्र दराज लोगों को जकड़ती थी लेकिन, खान-पान और वातावरण में आ रहे बदलाव के चलते इसके जीवाणु फैल रहे हैं। यही जह है कि टीबी के ग्राफ में एकदम उछाल आया है। इस उछाल में उम्रदराज ही नहीं बल्कि बचपन लेकर किशोरावस्था के लोग भी टीबी से ग्रस्त मिले हैं। गजरौला के सरकारी अस्पताल में वर्तमान में 350 मरीज एक्टिव हैं।

इन मरीजों में सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें बच्चों की भी संख्या भी 80 से 100 है। इस खतरनाक बीमारी की जद में बचपन घिर रहा है। बच्चों में आंख, गला और आंत की टीबी के लक्षण मिले हैं। जो अस्पताल से उपचाराधीन हैं। दस साल तक के बच्चे को टीबी है। जिसका इलाज गजरौला के अस्पताल से चल रहा है। ऐसे की मुहल्ला नाईपुरा में एक मनोरोगी किशोरी में भी टीबी की पुष्टि हुई है। इसके अलावा गांवों में बच्चे टीबी के रोग से ग्रस्त हैं। आंखों की टीबी में बच्चों की पुतलियों पर प्रभाव पड़ने के साथ रैटीना कमजोर पड़ रहा है। गले की नस फूलने के साथ खाने-पीने में तकलीफ है। टीबी से पीड़ित बच्चों की उम्र देखकर हैरानी है। इस खतरनाक बीमारी की जकड़न में दस से लेकर 16 साल तक के बच्चे शामिल हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। 

एमडीआर की श्रेणी में पहुंची किशोरी : क्षय रोग विभाग के मुताबिक कई मरीज टीबी की स्टेज मल्टी ड्रग्स रेजिस्टेंट (एमडीआर) स्तर की श्रेणी में पहुंच गए हैं। यह सामान्य मरीजों से अलग हैं, जो खतरनाक स्टेज होती है। इसके इलाज के लिए विभाग को 24 से 27 महीने तक मरीज को दवाइयां देनी होती हैं। एमडीआर लेवल के मरीज के संपर्क में आने से तेजी से जीवाणु हमला करते हैं। साथ ही इनके जरिये अन्य लोगों को भी खतरा बढ़ जाता है। इस श्रेणी में 16 वर्षीय किशोरी भी पहुंच गई है।

मां-बाप को हुई टीबी तो मुन्ना-मुन्नी की भी होगी जांच : अगर, किसी को टीबी है तो वह अपने बच्चों से दूरी बनाकर रखें। क्योंकि टीबी की बीमारी का प्रकाेप बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब शासन ने आदेश जारी किया है कि अगर, मां-बाप को टीबी की पुष्टि होती है तो उनके बच्चाें की भी जांच कराई जाएगी। ताकि टीबी की बीमारी उन्हें न जकड़ ले। पहले क्या होता था कि बीड़ी, सिगरेट आदि का सेवन करने वाले को अधिक होती थी। मगर, अब टीबी की बीमारी एक दूसरे में तेजी के साथ फैल रही है। इसलिए शासन ने बच्चों की जांच कराने का भी निर्णय लिया है। इसकी शुरूआत हो गई है। अस्पताल में पहुंचने वाले टीबी के मरीज से उनके बच्चों की स्थिति के बारे में भी पूछा जा रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारीः गजरौला सीएचसी के टीबी रोग विशेषज्ञ श्योराज सिंह ने बताया कि टीवी एक संक्रामक बीमारी है जो माइक्रोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है। टीबी ज्यादातर के फेफड़ों पर हमला करता है लेकिन, यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है। जब टीबी रोग से ग्रसित व्यक्ति कहा खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रमण बाहर निकलता है। जो कि हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता। बच्चों में इस बीमारी के लक्षण पीड़ित माता-पिता या अन्य मरीजों के संपर्क में जाने से मिल रहे हैं। 

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