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Coronavirus : महामारी में न रामपुरी खां साहब याद आ रहे न नवाब साहब Rampur News

रामपुर (मुस्‍लेमीन)। दुनियाभर में दहशत फैलाए कोरोना के सामने सारे मुद्दे फीके पड़ गए। नवाबों के शहर में पिछले दो माह से दो अहम मुद्दे चर्चा में थे। पहले शाही खानदान की दौलत के बंटवारे का मामला सुर्खियों में रहा तो बाद में रामपुरी खां साहब के जेल जाने का मामला मीडिया में छाया रहा। लेकिन, कोरोना वायरस के छा जाने के बाद से दोनों मुद्दे पीछे चले गए हैं। अब न कोई रामपुरी खां साहब को याद कर रहा है और न ही शाही खानदान की दौलत की चर्चा । अब छोटे-बड़े हर शख्स की जुबान पर सिर्फ एक ही बात है कोरोना कोरोना। लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं आखिर इससे कब निजात मिलेगी? घरों में कैद करके रख दिया है। बुजुर्ग कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी ङ्क्षजदगी में इससे पहले कभी ऐसा मंजर नहीं देखा, जब किसी बीमारी की वजह से घरों में कैद होना पड़ा हो।

गुम हो गए क्लब

समाज की सेवा का दम भरने वाले धन्ना सेठों के क्लब मुसीबत की घड़ी में कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। कोरोना वायरस के चलते देशभर में लाखों लोग अपने घरों में कैद हैं। गरीब और रोज मजदूरी करने वालों के लिए रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो गई है। ऐसे में सरकार और कई सामाजिक संगठन इनकी मदद कर रहे हैं, ताकि कोई भूखा न रहे। नामचीन होटलों में मीङ्क्षटग करने वाले इन क्लबों के पदाधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं। मदद करना तो दूर, किसी गरीब के आसपास भी नजर भी नहीं आ रहे हैं। इन क्लबों के पदाधिकारी अक्सर कंबल या पुराने कपड़े बांटकर मीडिया में चेहरे चमकाने का प्रयास करते रहते हैं। अब देश के गरीब और कमजोर संकट में फंसे हुए हैं तो ये गायब हैं। लोगों का कहना है कि इन क्लबों को तो गरीबों और कमजोरों की मदद करने के लिए आगे आना चाहिए।

कोरोना से मुसीबत में मुल्लाजी

कोरोना महामारी ने मुल्लाजी को मुसीबत में डाल दिया है। उनकी यह परेशानी दिल्ली मरकज से निकले जमातियों के कोरोना की चपेट में आने से बढ़ी है। हुकुमत ने उनके तमाम साथियों को भी पकड़कर क्वारंटाइन कराने के आदेश कर दिए हैं। अब मुल्लाजी जान बचाने के लिए जंगल में भटक रहे हैं, फिर भी वर्दी वाले पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन, वे इन्हें हाथ से नहीं पकड़ते। दूर से ही डंडा दिखाकर भेड़ बकरियों की तरह हांक रहे हैं। दरअसल, पुलिस वालों को डर है कि अगर मुल्लाजी का हाथ लग गया तो उन्हें भी कोरोना वायरस अपनी चपेट में ले सकता है। इसी डर से वे मुल्लाजी से दो मीटर की दूरी बनाए रहते हैं। घेराबंदी के दौरान अगर मुल्लाजी भागने की कोशिश करते हैं तो उन्हे डंडा फेंककर या धमकाकर ही कब्जे में करते हैं। मुल्लाजी के पास आने में अस्पताल के डाक्टर भी घबरा रहे हैं।

बेईमानी की हद कर दी

कोरोना के चलते लॉकडाउन में सरकार और समाजसेवी गरीबों की मदद करने में लगे हैं। लेकिन, कुछ राशन डीलर हैं कि बेईमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। गरीबों के राशन पर डाका डाल रहे हैं। इसमें कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। हाकिम की सख्ती के कारण आधा दर्जन बेईमान पकड़ में भी आ गए हैं। अब जेल की हवा खा रहे हैं। इनके रिश्तेदार भी इनकी इस हरकत पर शर्मिंदा है और तरह-तरह के ताने दे रहे हैं। कह रहे हैं हद कर दी बेईमानी की। संकट के दौर में भी गरीबों के हक पर डाका डालने से बाज नहीं आए। इन्हें तो कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कुछ लोग कह रहे हैं कि हराम का खाने की आदत पड़ गई है। कई ने तो गरीबों का राशन बेचकर ही आलीशान कोठी भी बना ली हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए लेकिन, हाकिम की नजर गढ़ गई है।

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