मैडम को हस्ताक्षर से डर

मैडम को हस्ताक्षर से डर
Publish Date:Sat, 31 Oct 2020 02:43 AM (IST) Author: Jagran

मुरादाबाद: महिला शिफाखाने में बहुत कुछ बदला नजर आ रहा है। प्रमुख पद पर आई मैडम इन दिनों बिल की फाइलों को छोड़कर सभी पत्र-प्रपत्रों पर हस्ताक्षर कर देती हैं। हालात ये हैं कि उन्होंने पुराने किसी भी बिल पर अपने हस्ताक्षर करने से ही इन्कार कर दिया है। कर्मचारियों ने गुहार लगाई कि हमारा वेतन तो क्लीयर करा दीजिएगा, हमारे सामने तो भरण पोषण का संकट हो जाएगा। उनकी बात मान ली। मैडम विभाग के पिछले बिलों को लेकर इतनी संजीदा हैं कि एक-एक बिल के बारे में पूरी जांच कर रही हैं। इसके बाद ही फाइल क्लीयर करती हैं। शायद उन्हें लगता है कि इससे पहले जो यहां रहा कुर्सी पर रहा, ऐसा तो नहीं है कि पिछले कार्यकाल की गलती का दंड उनको भुगतना पड़े। अब तो जो भी कर्मचारी फाइल पास कराने के लिए आते हैं, जवाब से संतुष्ट नहीं कर पाने पर वापस चले जाते हैं।

चोरी का पता सबको

शिफाखाने के बड़े साहब के कार्यालय का हाल भी अजीब है। कोई कुछ भी सामान ले जाए, किसी को पता भी नहीं चलता है। पिछले दिनों संक्रमण टेस्ट कराने वाला लाखों का सामान चोरी हो गया। इसकी किसी को भनक तक नहीं लग सकी। चोरी होने के बाद से एक-दूसरे को चोर की नजरों से देखा जा रहा है। विभाग में आपस में बातें भी हो रही हैं कि कौन ले जा सकता है संक्रमण जाचने वाला सामान। एक लाख से ज्यादा की कीमत का सामान को बिना मिलीभगत के ले जाना संभव नहीं दिखता। एक किट की कीमत 1500 के लगभग है। 125 किट कहां चली गई, या फिर निजी शिफाखाने को बेच दीं गई। सभी एक दूसरे पर शक कर रहे हैं। किसने बेची होंगी। वैसे इसकी जानकारी सबके पास आ गई है। लेकिन, बड़े साहब को बताने में डर लगता है। सभी इससे दूर रखना चाहते हैं।

ठेकेदार बनने पर हुई फजीहत

कोरोना संक्रमण काल की वजह से धाíमक आयोजनों पर पूर्ण पाबंदी लगा रखी है। इसको लेकर हाकिम ने भी मंजूरी नहीं दी। इसके बावजूद सियासत चमकाने वालों ने कोई कमी नहीं छोड़ी। धाíमक कमेटी से जुड़े सदस्य ही नहीं सियासतदा ने भी इसमें खुद को चमकाने में पीछे नहीं हैं। समिति की बिना घोषणा किए उन्होंने धाíमक आयोजन नहीं होने की घोषणा कर दी। इस बात को लेकर समिति सदस्य इतने खफा हुए कि उन्होंने फोन पर ही सियासतदां की बातों का खंडन करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं इसको लेकर प्रचार करने में पीछे नहीं रहना चाहते थे। अब इसकी साइकिल वाले नेताजी से भी शिकायत कर डाली। सोच रहे हैं कि इस बार तो जो हुआ सो हो गया। लेकिन, अगले साल की प्लानिंग को अभी से बनाना शुरू कर दी है। इस बार तो जो करना था कर दिया। उम्मीद अगली बार कोई सियासत नहीं होगी।

दान दक्षिणा से परेशानी कम

त्योहारों के मौसम में बाजार से जेब गर्म होगी। इसको लेकर विभाग भी अपनी अलग से तैयारी कर लेते हैं। कोरोना काल की वजह से सबने मान लिया था अबकी बार मिठाई के भी फाके पड़ जाएंगे। लेकिन, सरकार ने सबकुछ अनलॉक कर दिया। अब विभागों के हाकिमों ने भी त्योहार की तैयारी में छापामारी शुरू कर दी है, जिसने दान-दक्षिणा दे रखी है। उसे बख्श देने की परंपरा है, जहां से सेवा पानी कम तो समझो उसकी फजीहत भी पक्की और जुर्माना भी मोटा लग सकता है। ऐसे हालात खाने-पीने वाले विभाग की गतिविधियों में देखने को मिल रहे हैं। इसकी चर्चा बाजार में खूब हो रही है। बाजार में दुकान चलाने वाले आपस में चर्चा करते हैं कि भाई दान-दक्षिणा का इंतजाम रखो। इसमें कमी आ गई तो कोरोना की मार का असर खत्म नहीं होगा। दूसरी परेशानिया अलग से शुरू हो जाएंगी। इसलिए पूरी तरह सावधान रहिए।

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