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पिता की अस्थिया विसíजत करने गए थे हरिद्वार, बंदी में फंस गए मुरादाबाद

मुरादाबाद, जेएनएन। पिता की अस्थियां विसर्जन करने हरिद्वार गए बहराइच और लखीमपुर खीरी के चार लोग बंदी में फंस गए। वह पैदल बिजनौर के नजीबाबाद तक पहुंचे। फिर मदद लेकर मुरादाबाद तक तो पहुंच गए, पर यहां से आगे नहीं जा पा रहे हैं। घर जाने के लिए वाहन नहीं मिला और होटल बंद होने के कारण खाना भी नहीं मिल सका। अब वे बंदी समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं।

बहराइच के थाना मोतीपुर के जालिमनगर के रामनिवास के पिता बदलूराम की मौत हो गई थी। वह बंदी से एक दिन पहले पिता की अस्थियां विसर्जन करने हरिद्वार गए थे। उनके साथ परिवार का ही एक युवक और भी था। रामनिवास की हरिद्वार में ही लखीमपुर खीरी के थाना ईसानगर के पलिहा गांव निवासी त्रिभुवन लाल से मुलाकात हुई। वह भी अपने पिता मान वर्मा की अस्थियां विसर्जन करने आए थे। उनके साथ राममिलन भी था। दोनों ने पिता की अस्थियां तो गंगा में विसर्जित कर दीं पर घर वापस होना मुश्किल हो गया। बंदी होने की वजह से यातायात के सभी साधन बंद थे। इस पर चारों लोग पैदल ही हरिद्वार से नजीबाबाद तक पहुंचे। रास्ते में कहीं खाना तक नहीं मिला। वहां से एक वाहन मिला, जिसने मुरादाबाद तक छोड़ दिया। चारों ने पीतलनगरी बस स्टैंड पर रात गुजारी। ट्रेन की तलाश में स्टेशन पहुंचे तो वहां की बंदिशों की वजह से लौट गए।

स्टेशन और रोडवेज पर भटक रहे लोग बंदी में और भी तमाम लोग फंस गए हैं। बरेली के नवाबगंज का युवक सुखपाल बिजनौर में नौकरी करता था। वह मुरादाबाद तक किसी वाहन से आ गया लेकिन, यहां से बरेली तक के लिए कोई सवारी नहीं मिल पा रही है। पीलीभीत जाने के लिए मुहम्मद आजम बहुत परेशान था। बदायूं के मुहल्ला सोथा निवासी अफरोज हुसैन गाजियाबाद से तो किसी तरह मुरादाबाद में पाकबड़ा तक आ गया लेकिन आगे जाने की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई।

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