Common Facility Center : इटली की मशीन तराशेगी हडडी-सींग के बटन, कारोबार से जुड़े लोगों को होगा बड़ा फायदा

Common Facility Center in Sambhal सीएफसी का निर्माण चार माह में पूरा होने की उम्मीद है। ऐसे में बटन तराशने वाली मशीन का आर्डर भी दे दिया गया है। यह इटली से आएगी। प्रसिद्ध कंपनी बोनाइटी की इस मशीन की कीमत भी ढाई से तीन करोड़ है।

Narendra KumarTue, 21 Sep 2021 04:10 PM (IST)
सबसे बड़ा फायदा सीधे लाभ कमाने से जुड़ा है।

मुरादाबाद [राघवेंद्र शुक्ल]। Common Facility Center in Sambhal : अब तक एक हजार से 1100 करोड़ का सालाना कारोबार करने वाले सम्भल के छोटे बड़े 10000 से ज्यादा एक्सपोर्टर के लिए कामन फैसिलिटी सेंटर मील का पत्थर बनने वाला है। हालांकि सम्भल को एक जिला एक उत्पाद के तहत हड्डी व सींग कारोबार के लिए सरकार ने चुना है तो हडडी के बटन को तराशने के लिए पहल हुई है। मशीन के अभाव में किलो के भाव बिकने वाले हडडी व सींग के बटन की फिनिशिंग के लिए अब न तो गुड़गांव जाना होगा न ही नोएडा। ढाई से तीन करोड़ रुपये मूल्य वाली यह विदेशी मशीन सम्भल के रसूलपुर में लगेगी। इटली की कंपनी की इस मशीन के जरिए हड्डी व सींग के बटन की फिनिंशिंग कर उन्हें नया लुक दिया जाएगा। इसके लग जाने से हडडी सींग कारोबार से जुड़े पांच हजार से ज्यादा छोटे बड़े कारोबारी सुकून महसूस करेंगे। सबसे बड़ा फायदा सीधे लाभ कमाने से जुड़ा है। मशीन न होने से बटन को कम रेट में बेचना पड़ता था।

हडडी व सींग के काम के लिए सम्भल की पहचान यूपी ही नही देश तथा विदेश में भी है। यहां के कारीगरों ने नक्कासी के जरिए सम्भल को पहचान दिला दी है। यहां बटन का सबसे ज्यादा कारोबार होता है। ब्लैक बफैलो के बटन की कीमत जहां 300 से 1000 रुपये किलोग्राम है, वहीं कलरफुल बटन विदेश में 2000 से 3000 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकता है। बटन खरीदने के बाद बॉयर इनको मशीनों के जरिए फिनिश कराकर दोगुने से तीन गुने दाम में बेच देते थे। जो लाभ यहां के कारोबारी को मिलना चाहिए था वह उन्हें नहीं मिलता था। जबकि बटन को बनाने, हडडी को घींसने सहित अन्य काम में कारीगर खुद की जान को भी जोखिम में डालते हैं। सरकार ने जब कामन फैसिलिटी सेंटर की मंजूरी दी तो यहां के कारोबारियों की उम्मीदो को पंख लग गए। शासन ने मंडल में तीन कामन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) को मंजूरी दी तो सम्भल में भी इसमे शामिल था। कार्यदायी संस्था हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन को बनाया। नौ करोड़ की मंजूरी में भवन के लिए सरकार पैसा देगी जबकि शेष एसोसिएशन लगाएगा।  इटली से बोनाइटी कंपनी की बटन तराशने वाली मशीन आएगी। मशीन लगने के बाद बटन यहीं तराशे जाएंगे।

किलो नहीं पीस के हिसाब से बिकेगा : अभी तक बटन किलो के भाव में बिकता था। मशीन लगने के बाद बटन फिनिश होंगे तो यह पीस के हिसाब से बिकेंगे। बटन कारोबारी अब्दुल बाकी कहते हैं कि अब तक जो बटन बिकते थे। वह कारोबारी सम्भल से किलो का भाव लेते हैं और पीस के हिसाब से अमेरिका, जर्मनी, जापान, इंग्लैंड व अरब देशों में बेचते थे।

हैंडीक्राफ्ट कारोबार को यह सेंटर नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएगा। जल्द ही सेंटर भी तैयार होगा और मशीन भी लगा दी जाएगी।

ताहिर सलामी अध्यक्ष हैंडीक्राफ्ट एसोसएिशन

इसके लिए काफी प्रयास किया गया तब जाकर मंजूरी मिली। कई बार शासन स्तर पर अफसरों से मुलाकात कर सेंटर को मंजूरी दिलवाई गई।

कमल कौशल, निर्यातक

सम्भल के सीएफसी सेंटर के जरिए यहां के कारोबार को पंख लगेंगे। यहां आने वाले सभी रास्तों को दुरुस्त किया जाएगा। इसके अलावा अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी।

संजीव रंजन डीएम सम्भल

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