CBI In Moradabad : पिछले साल भी एक बैंक महाप्रबंधक को रिश्वत लेते पकड़ा गया था, लगातार सामने आ रहे मामले

CBI In Moradabad तीन दिन के बाद महाप्रबंधक को निलंबित कर दिया गया था। अब 30 नवंबर को मूंढापांडे ब्लाक के लाला टीकर गांव की प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा के एक अधिकारी को भी पकड़ने का मामला सामने आया है।

Narendra KumarPublish:Wed, 01 Dec 2021 06:41 AM (IST) Updated:Wed, 01 Dec 2021 06:41 AM (IST)
CBI In Moradabad : पिछले साल भी एक बैंक महाप्रबंधक को रिश्वत लेते पकड़ा गया था, लगातार सामने आ रहे मामले
CBI In Moradabad : पिछले साल भी एक बैंक महाप्रबंधक को रिश्वत लेते पकड़ा गया था, लगातार सामने आ रहे मामले

मुरादाबाद, जागरण संवाददाता। CBI In Moradabad : प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक में रिश्वतखोरी के मामले में अफसर पहले भी सीबीआइ के रडार पर आ चुके हैं। सवा दो साल में प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक में रिश्वतखोरी के तीन मामले प्रकाश में आ चुके हैं। सबसे बड़ा मामला 16 अगस्त 2020 को सामने आया था। तत्कालीन महाप्रबंधक रविकांत को सीबीआइ ने 50 हजार रुपये रिश्वत और एलईडी टीवी के साथ पकड़ा था। तब शाम करीब पांच बजे गाजियाबाद से आई सीबीआइ टीम ने प्रथमा ग्रामीण बैंक के महाप्रबंधक रविकांत के घर व प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक मुख्यालय पर छापा मारा था।

गाजियाबाद की रिकवरी एजेंसी के मालिक ने रिश्वत मांगने के मामले की शिकायत सीबीआइ से की थी। जीएम ने एजेंसी से रिश्वत एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) की रिकवरी के लिए टेंडर दिए जाने के नाम पर मांगी थी। सीबीआइ के छापे में जीएम के घर में रखे पांच लाख रुपये और एलईडी टीवी सीबीआइ टीम ने कब्जे में ले लिया था। तीन दिन के बाद महाप्रबंधक को निलंबित कर दिया गया था। अब 30 नवंबर को मूंढापांडे ब्लाक के लाला टीकर गांव की प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा के एक अधिकारी को भी पकड़ने का मामला सामने आया है।

जुलाई 2019 में भी तत्कालीन जीएम शैलेश रंजन से सीबीआइ ने की थी छह घंटे पूछताछ : जुलाई 2019 में प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक के महाप्रबंधक शैलेश रंजन से भी सीबीआइ ऋण के मामले में पूछताछ करने आ चुकी है। तत्कालीन जीएम शैलेश रंजन इंपीरियल ग्रीन में रहते थे। उनके आवास पर सीबीआइ ने छापा मारा था। शैलेश रंजन से पूछताछ का मामला कोलकाता में उनकी तैनाती के दौरान का था। इसके बाद उनका स्थानांतरण मुरादाबाद होने के बाद सीबीआइ ने कोलकाता से संबंधित ऋण के मामले में छह घंटे पूछताछ की थी।

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