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रेलवे के मकडज़ाल में फंसी 35 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें,यात्रियों को हो रही परेशानी Moradabad News

मुरादाबाद (प्रदीप चौरसिया)। रेलवे के मकडज़ाल में श्रमिक स्पेशल ट्रेनें फंस कर रही गई हैं। हाल यह है कि ट्रेनों के रास्ता भटकने से घंटों रास्ते में रुकी रहती हैं ऐसे में श्रमिकों को पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। मंत्रलय के डर से कोई भी अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।

इसका उदाहरण एक ट्रेन के रूट से समझा जा सकता है। राजकोट (गुजरात) से आगरा, भोपाल होते हुए जबलपुर तक श्रमिक ट्रेन को चलाया जाना था। बिना किसी योजना के इसका मार्ग बदल दिया गया। ट्रेन आगरा के बजाय दिल्ली, मुरादाबाद लखनऊ झांसी होकर चली। इससे ट्रेन 12 घंटे से अधिक लेट हो गई। रेल मंत्रलय श्रमिक ट्रेनों को डीजल के बजाय इलेक्टिक इंजन से चला रहा है। इलेक्टिक इंजन संचालित ए श्रेणी के मार्गो पर ट्रेनों की संख्या बढ़ गई है। सबसे अधिक प्रवासी महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली से लौट रहे हैं। इसके चलते दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली कोटा होकर मुंबई, दिल्ली-भोपाल, मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग पर ट्रेनों की संख्या अधिक हो गई। ए श्रेणी के मार्ग पर ट्रेनों की संख्या बढऩे से बी श्रेणी के विद्युतीकरण मार्ग पर ट्रेनों का संचालन कर दिया गया है। प्लानिंग के अभाव में मुंबई से मुजफ्फरपुर जाने वाली ट्रेन राउरकेला (उड़ीसा) पहुंच गई। पिछले दिनों मुंबई स्टेशन से कासगंज बरेली, मुरादाबाद होकर मुजफ्फनगर के लिए ट्रेन चलाई गई। झांसी के बाद इस ट्रेन का मार्ग बदल दिया गया। यह ट्रेन बरेली कासगंज के बजाय दिल्ली होकर मुजफ्फरनगर जाने के कारण 12 घंटे देर से पहुंची।

श्रमिक ट्रेन संचालन में जोन की सीमा बाधक

श्रमिक ट्रेन संचालन में जोन की सीमा दूसरा बड़ा बाधक बनकर सामने आ रहा है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली से आने वाली ट्रेनें मुरादाबाद होकर गुजरती हैं। लखनऊ में जोन का विवाद हो जाता है। इससे लखनऊ की सीमा में रविवार देर रात 35 श्रमिक ट्रेनें पांच घंटे से अधिक समय तक रुकी रहीं। लखनऊ रेलवे स्टेशन होकर नार्थ ईस्ट रेलवे का भी रूट है। उन्नाव होकर उत्तर मध्य रेलवे की ट्रेनें आती हैं। एनई रेलवे अपनी ट्रेन चलाने के लिए अन्य रेल जोन से आने वाली ट्रेनों को रास्ता नहीं देता है। इससे मुरादाबाद रेल मंडल में ट्रेनें रुकना शुरू हो जाती हैं। इस मामले को लेकर रेलवे का कोई अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं है। सारी कहानी रेलवे के रिकार्ड में दर्ज है। ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड भी परेशान हैं, लेकिन वे भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

 

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