गड़बड़ाधाम में हजारों श्रद्धालुओं ने नवाया मां के चरणों में शीश

हलिया विकास खंड के प्रसिद्ध गड़बड़ाधाम में सोमवार कृष्ण पक्ष दसवीं होने के कारण सुबह से ही मां शीतला का भव्य स्वरूप का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। घंटा-घड़ियाल व ढोल नगाड़ा के साथ श्रद्धालुओं के जयकारे से मंदिर परिसर गूंजता रहा।

JagranPublish:Mon, 29 Nov 2021 05:43 PM (IST) Updated:Mon, 29 Nov 2021 05:43 PM (IST)
गड़बड़ाधाम में हजारों श्रद्धालुओं ने नवाया मां के चरणों में शीश
गड़बड़ाधाम में हजारों श्रद्धालुओं ने नवाया मां के चरणों में शीश

जागरण संवाददाता, गड़बड़ाधाम (मीरजापुर) : हलिया विकास खंड के प्रसिद्ध गड़बड़ाधाम में सोमवार कृष्ण पक्ष दसवीं होने के कारण सुबह से ही मां शीतला का भव्य स्वरूप का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। घंटा-घड़ियाल व ढोल नगाड़ा के साथ श्रद्धालुओं के जयकारे से मंदिर परिसर गूंजता रहा। भोर से लेकर दोपहर तक 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं में मां के दरबार में हाजिरी लगाई।

दूरदराज से पहुंचे श्रद्धालु सेवटी नदी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद दर्शन पूजन करने के लिए मंदिर पहुंचे। मंगल आरती के बाद से ही कतारबद्ध होकर मां शीतला की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु बेताब रहे। सभी ने सुख शांति समृद्धि के साथ ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। माता के स्नान के जल को आचमन के रूप में ग्रहण किया।

महिलाओं ने प्रसाद स्वरूप फल-फूल, हलवा-पूड़ी चड़ाकर मनोकामना पूर्ण करने की विनती की। हालांकि तमाम परेशानियों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था भारी दिखी। महिलाओं ने दर्शन पूजन करने के बाद जमकर खरीदारी की। घरेलू सामान के साथ ही बास के बने बर्तनों को खरीदा, वहीं बच्चों ने अपने लिए खिलौने आदि लिए। 15 दिवसीय मेला आगामी सोमवार से हो रहा प्रारंभ

पंद्रह दिवसीय मेले में पहले सोमवार को गवई तथा दूसरे सोमवार को शहरी तथा तीसरे सोमवार को गवई मेले से समापन होता है, लेकिन सरकारी अमले की अनदेखी के कारण अभी तक श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है। सेवटी नदी में स्नान करने वाले घाट को भी दुरुस्त नहीं कराया गया है और न ही साफ-सफाई की व्यवस्था दिख रही है। पुरातन से चले आ रहे मेले में लगभग दस लाख लोग दर्शन-पूजन करते हैं। मेले में जनपद के अलावा वाराणसी, सोनभद्र तथा प्रयागराज, मध्य प्रदेश, बिहार राज्य के भक्त आते हैं, लेकिन सरकारी महकमे की अनदेखी से अभी तक समुचित व्यवस्था नहीं कराई गई है।