सरकारी अस्पतालों में अन्य रोगों के लिए नहीं शुरू हुई ओपीडी सेवा

जागरण संवाददाता मीरजापुर सरकारी चिकित्सालयों में ओपीडी शुरू नहीं होने से आम मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। व्यवस्था चालू न होने से मरीज नर्सिंग होम में अपना इलाज कराने को विवश है। इसमें उनको सौ रुपये लेकर दो हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं जबकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की फीस नहीं देना पड़ता है। दवाए भी फ्री में मिल जाती है। कुछ जांचे भी फ्री में हो जाती है लेकिन ओपीडी सेवा बंद होने से उनको यह लाभ नहीं मिल पा रहा है।

JagranThu, 17 Jun 2021 11:21 PM (IST)
सरकारी अस्पतालों में अन्य रोगों के लिए नहीं शुरू हुई ओपीडी सेवा

जागरण संवाददाता, मीरजापुर : सरकारी चिकित्सालयों में ओपीडी शुरू नहीं होने से आम मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। व्यवस्था चालू न होने से मरीज नर्सिंग होम में अपना इलाज कराने को विवश है। इसमें उनको सौ रुपये लेकर दो हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं जबकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की फीस नहीं देना पड़ता है। दवाए भी फ्री में मिल जाती है। कुछ जांचे भी फ्री में हो जाती है ,लेकिन ओपीडी सेवा बंद होने से उनको यह लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जनपद के मंडलीय चिकित्सालय समेत अन्य सरकारी अस्पताल में सरकार ने कोरोना को देखते हुए ओपीडी सेवा अप्रैल महीने में बंद कर दी थी। करीब दो महीने बाद जून महीने में मंडलीय चिकित्सालय में सर्जरी ओपीडी सुविधा शुरू कर दी लेकिन अन्य रोगों के डाक्टरों को बैठने की इजाजत नहीं दी। जबकि सर्दी जुकाम बुखार, आदि रोगों के मरीज अधिक आते हैं। ऐसे में गले, नाक कान, फिजिशियन, हार्ट, चर्मरोग आदि के मरीज नर्सिंग होम में इलाज करने जा रहे हैं। वहां पर मरीजों को डाक्टरों की फीस, दवाओं और जांच के रुपये देने पड़ रहे हैं। ऐसे में उनका हजारों रुपये खर्च हो जा रहा है जबकि सरकारी अस्पतालों में ऐसा नहीं होता है। इस समस्या से सबसे अधिक मध्यम और गरीब वर्ग के मरीज परेशान है। चील्ह निवासी रमेश का कहना हैं कि वह पिछले 15 दिनों से बीमार चली रहे थे। मंडलीय चिकित्सालय में गया तो बताया कि यहा ओपीडी बंद है। बाहर जाकर किसी चिकित्सक को दिखा ले। एक नर्सिंग होम में गया तो वहां एक हजार रुपये खर्च हुए। इसी प्रकार नगर निवासी राकेश, विकास, अनुराग आदि ने कहा कि अन्य रोगों के चिकित्सकों के ओपीडी में नहीं बैठने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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