प्रदेश में लहराएगा मैरून व भगवा : डा. संजय

निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद ने कहा कि भाजपा व निषाद पार्टी के बीच गठबंधन हो गया है। आगामी विधानसभा चुनाव दोनों एक साथ मिलकर लड़ेंगे लेकिन मीरजापुर में पार्टी का प्रत्याशी मछुआ बाहुल्य क्षेत्र में अपने सिबंल पर चुनाव लड़ेगा।

JagranFri, 22 Oct 2021 10:54 PM (IST)
प्रदेश में लहराएगा मैरून व भगवा : डा. संजय

जागररण संवाददाता, मीरजापुर : निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद ने कहा कि भाजपा व निषाद पार्टी के बीच गठबंधन हो गया है। आगामी विधानसभा चुनाव दोनों एक साथ मिलकर लड़ेंगे, लेकिन मीरजापुर में पार्टी का प्रत्याशी मछुआ बाहुल्य क्षेत्र में अपने सिबंल पर चुनाव लड़ेगा। निषादों के उत्थान के लिए आज तक किसी पार्टी ने नहीं सोचा, इसलिए उनका विकास कराने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में यह गठबंधन 403 सीटें पर विजय हासिल करेगा। इसमें 160 सीटों पर मैरून व भगवा लहरेगा।

श्रृंगवेश्वर से नत्था लाल केवट ने भगवान श्रीराम को पार उतारा था और निषाद राज ने अपनी सेना को भगवान श्रीराम को देकर लंका पर विजय पताका फहराई, तब जाकर रामराज्य आया। कहा कि यह धरती फूलनदेवी की कर्म भूमि है। यही से वे दो बार सांसद रही है। जब उनकी मां को उनका अधिकार नहीं दिला देंगे तब तक वह चैन से बैठने वाले नहीं है।

जमीन को हड़पने वाले एक नेता को जेल भेजवाने का काम करेंगे। राष्ट्रीय सचिव अमेरिकन बिद, राकेश मौर्या, प्रांतीय अध्यक्ष मिठाई लाल, जिलाध्यक्ष संतोष कुमार केवट, उपाध्यक्ष दीपक निषाद आदि लोग शामिल रहे।

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डा. संजय ने विध्यधाम में टेका मत्था

विध्याचल : निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय ने शुक्रवार को मां विध्यवासिनी का दर्शन-पूजन कर देश की खुशहाली की कामना की। वह शुक्रवार सुबह 11 बजे मां विध्यवासिनी के दर्शन को विध्यधाम पहुंचे। गर्भगृह पहुंचने पर वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने मां विध्यवासिनी का चरण स्पर्श करने से मना किया तो झड़प हो गई। इससे मंदिर पर काफी हो-हल्ला मच गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि मां विध्यवासिनी हमारी कुल देवी हैं। मां का दर्शन-पूजन करने से कोई नहीं रोक सकता। वे मां विध्यवासिनी का चरण स्पर्श करने पर अड़ गए, लेकिन पुलिस ने चरण स्पर्श नहीं करने दिया। इसी बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आलाधिकारियों को फोन कर अवगत कराया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। अंत में उन्होंने नियमानुसार मां विध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करना ही उचित समझा और विधिवत पूजन-अर्चन किया।

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