विध्यधाम में वार्षिक घटा अभिषेक में उमड़े श्रद्धालु, एक लाख के बिके घड़े

जागरण संवाददाता, विध्याचल (मीरजापुर) : विध्यधाम में शनिवार को प्राचीन घटा अभिषेक का आयोजन किया गया। इस दौरान जिले व अन्य जनपदों के अलावा बिहार, मध्यप्रदेश प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने मिट्टी के घड़े में भरकर लाए पवित्र गंगा जल से मंदिर परिसर की विधिवत धुलाई की। साथ ही गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बने। इस दौरान मंदिर का कपाट सुबह दस बजे से डेढ़ बजे तक बंद रहा। इस दौरान मां का भव्य श्रृंगार एवं आरती करने के बाद दोपहर बाद डेढ़ बजे कपाट खुलते ही भारी संख्या में श्रद्धालु मां का रूप देखने को लालायित रहे। इस दौरान लगभग एक लाख से अधिक लोगों ने मां के दरबार में शीश नवाया।

विध्यधाम में भोर से ही श्रद्धा़लुओं को रेला उमड़ पड़ा । इस दौरान भोर से दस बजे तक मंदिर में लोगों ने मां विध्यवासिनी का दर्शन पूजन किया। इसके बाद मंदिर के कपाट को बंद कर दिया गया। साथ ही घटा अभिषेक की तैयारी शुरु हो गई। इस दौरान ब्राहमण समाज, गिरी समाज, गोस्वामी, नाई समाज, धैयकार समाज, चर्मकार समाज के लोगों के अलावा दूर दराज से आए श्रद्धालु मिट्टी के घड़े, पीतल, तांबे के कलश के साथ ओम स्वास्तिक बनाकर तरह-तरह के माला-फूल, कलावा, चुनरी से सजा कर पक्काघाट मां गंगा का पवित्र जल लेने के लिए पहुंचे। जहां स्नान ध्यान करने के बाद घड़े में गंगा जल भरकर कतारबद्ध होकर मां का जयकारा लगाते हुए एक साथ चले। इस दौरान मंदिर परिसर को गंगा जल से विधिवत धुलाई किया गया। इसके बाद दोपहर बारह बजे से एक बजे तक मां का भव्य श्रृुगार करने के साथ आरती की गई। इसके बाद आधे घंटे के लिए शयन के बाद डेढ़ बजे कपाट खोला गया। जहां भक्तों द्वारा मां का दर्शन किया गया। इस दौरान मंदिर व्यवस्था की कमान विध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, मंत्री भानू पाठक, तेजन गिरी कोषाध्यक्ष, नवनीत पांडेय, राज शुक्ला आदि जुटे रहे। एक लाख रुपये के बिके मिट्टी के घड़े

मंदिर के आसपास तथा बाहर और घाट पर घड़े के दर्जनों दुकानें सजी रही। जहां भक्तों द्वारा घड़े को खरीदा गया। इस दौरान एक लाख रुपये से अधिक के घड़े बिके। इस दौरान दुकानदारों द्वारा मनमाना दाम लिए गए। मान्यता है कि भक्त घड़े से मंदिर की धुलाई करने के बाद उसी घड़े को अपने घर ले जाते है और पूरे वर्ष भर उसी का पानी पीते है। रात आठ बजे मां का श्रृुंगार पूजन करने के बाद धैयकार व चर्मकार समाज के लोग संगीत प्रस्तुति करेंगे। बारह बजे रात्रि के बाद निकासी निकलेगी।

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