करोड़ों की लागत से तैयार बंजारी व मड़वा धनावल बंधा अनुपयोगी

करोड़ों की लागत से तैयार बंजारी व मड़वा धनावल बंधा अनुपयोगी

- सुखड़ा बांध से दोनों बंधे को दिया जाए जोड़ मिले सहूलियत - सैकड़ों गांव में हजारों एकड़

JagranSat, 27 Feb 2021 05:15 PM (IST)

- सुखड़ा बांध से दोनों बंधे को दिया जाए जोड़, मिले सहूलियत

- सैकड़ों गांव में हजारों एकड़ खेतों की आसानी से होगी सिचाई

- किसानों का आरोप,जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार, सुनवाई नहीं

जागरण संवाददाता, गड़बड़ाधाम (मीरजापुर) : क्षेत्र के बंजारी गांव स्थित कोठरा मोहल्ला में बंजारी व मड़वा धनावल में बना बंधा विभागीय अनदेखी के चलते कई वर्षों से सूखा पड़ा हुआ है। क्षेत्र के सैकड़ों गांव के किसान सिचाई नहीं कर पा रहे हैं, उनकी दिन रात की मेहनत के साथ गाढ़ी कमाई बर्बाद हो जाती है। किसानों का मानना है कि अगर दोनों बंधे को सुखड़ा बांध से जोड़ दिया जाए तो काफी हद तक सहूलियत मिलेगी और खेतों की आसानी से सिचाई के साथ आमदनी भी दोगुनी हो जाएगी। विकास खंड हलिया में वर्ष 1967 से लगातार कई वर्ष तक पड़े भयंकर अकाल से देश में कितने किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच गए थे। तत्कालीन प्रधानमत्री इंदिरा गांधी की सरकार की ओर से सूखे से निपटने के लिए दीर्घायु सिचाईं के लक्ष्य से संभावित क्षेत्रों में बंधा निर्माण की योजना शुरू की गई। उसी समय मड़वा धनावल गांव में मिट्टी खोदाई कर दो किलोमीटर लंबा, लगभग 20 मीटर ऊंचा बंधे का निर्माण शुरू कर दिया गया, जो कि कई करोड़ की लागत से वर्ष 1963 में मड़वा धनावल बंधा के नाम से बनकर तैयार हो गया। साथ ही इस परियोजना से वंचित पैरल ग्राम बंजारीकला, इंद्रवार, धनावल के असिचित भू भाग को सिचित करने के उद्देश्य तत्कालीन सिचाई मंत्री लोकपति त्रिपाठी के प्रयास से वर्ष 1986 में दो किलोमीटर लंबा तथा लगभग 15 मीटर ऊंचा मिट्टी का बड़ा बांध के निर्माण की योजना स्वीकृत की गई। यह जानकारी गांव निवासी शिवदान बहादुर सिंह ने देते हुए बताया कि सिचाई विभाग के तत्कालीन एसी सतीश चंद्र मिश्रा व जेई रघुवंश सिंह की देखरेख में वर्ष 1989 में कार्य आरंभ हुई जो करोड़ों की लागत से वर्ष 2004 में बंजारी बंधा के नाम से बनकर तैयार किया गया। हालांकि उक्त दोनों बंधे सरकारी तंत्र के उपेक्षा के कारण आज की स्थिति में अनुपयोगी हो गए हैं। गर्मी में पानी के लिए परेशान होते हैं वन्य जीव एक ओर यह परियोजना सिचाई के लिए महत्वपूर्ण तो है ही, उससे कहीं ज्यादा गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए भी इन दोनों बंधों का बड़ा महत्व है, लेकिन दुर्भाग्य से आज इनसे संबंधित लगभग दर्जनों गांवों के किसानों की उपजाऊ भूमि सिचाई के अभाव में परती रह जा रही है। - बोले किसान क्षेत्र के छोटे सिंह, सूर्य प्रताप सिंह, संजय सिंह, दिलीप सिंह, सुरेंद्र बहादुर, रवि प्रकाश, तउल्लन शर्मा, मुन्ना दुबे, सालिक राम, वशिष्ठ दुबे, अजय सिंह, लल्लन सिंह, पंकज सिंह, रामनरेश सहित सैकड़ों किसानों का कहना है कि इन दोनों बंधों को समीप के ही सुखड़ा बंधे से जोड़ दिया जाय तो हजारों एकड़ असिचित भूमि सिचित हो जाएगी।

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