World Family Day 2021: कोरोना की मुश्किलों ने बखूबी समझा दी परिवार की अहमियत, एक-दूसरे की सेहत का रखते हैं ख्‍याल

परिवार के साथ व्यायाम करते मेरठ के डा. जबर सिंह सोम।

कोरोना संक्रमण के दौरान पिछले दो साल से परिवार की अहमियत का पता चला है। मुश्किल हालात में परिवार का साथ मिलने से लोग हर तरह की परेशानी से लड़ पा रहे हैं। साथ रहते हुए वह अपने परिवार के स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी ख्याल रख रहे हैं।

Himanshu DwivediSat, 15 May 2021 11:27 AM (IST)

मेरठ, जेएनएन। भौतिकता की दौड़ में एकल परिवार का चलन बढ़ रहा है। वहां संयुक्त परिवार का महत्व भी कम नहीं हुआ है। कोरोना संक्रमण के दौरान पिछले दो साल से परिवार की अहमियत का पता चला है। मुश्किल हालात में परिवार का साथ मिलने से लोग हर तरह की परेशानी से लड़ पा रहे हैं। कोविड के चलते बाहरी आवाजाही थमी है तो लोग अपने घरों में परिवार के साथ सुकून से रह रहे हैं। साथ रहते हुए वह अपने परिवार के स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी ख्याल रख रहे हैं।

परिवार की फिटनेस पर ध्यान : फूलबाग कालोनी निवासी चौधरी चरण सिंह विवि में कुश्ती के प्रशिक्षक डा. जबर सिंह पांच भाई हैं। एक भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं। दो लोग बाहर नौकरी करते हैं। जबर सिंह सोम और उनके भाई जतन सिंह का परिवार के साथ रहता है। कोविड संक्रमण के चलते उनके बेटे भी अब घर पर ही हैं। परिवार में इस समय कुल नौ सदस्य हैं। पिछले साल जबर सिंह सोम के छोटे भाई जतन सिंह और उनकी पत्नी को कोविड हो गया था। उस समय परिवार में एक साथ रहने की वजह से उन्हें काफी मदद मिली। परिवार में साथ रहते हुए जबर सिंह सभी के स्वास्थ्य को लेकर भी जागरूक हैं। कोरोना से बचने के लिए सभी की सेहत ठीक रहे। इसके लिए वह सुबह और शाम को अपने छत पर ही सभी सदस्यों को लेकर अभ्यास कराते हैं। बकौल जबर सिंह परिवार के सभी सदस्यों के साथ रहने से समय कैसे गुजर जाता है, पता ही नहीं चलता है। संयुक्त परिवार होने की वजह से हर रिश्तों की अहमियत समझ में आती है।

प्रभातनगर के रहने वाले हिमांशु और पीयुष साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। हिमांशु पुणो में और पीयूष नोएडा में नौकरी करते हैं। पिछले साल कोविड के चलते कंपनी ने वर्क फ्राम होम किया, तब से दोनों भाई एक साथ घर पर हैं। परिवार में मां के अलावा उनकी तीन बड़ी और एक छोटी बहन भी हैं। पहले जब बाहर रहते थे, तो कभी कभार कुछ दिन के लिए आते थे। अब मार्च 2020 से वह परिवार के संग हैं। हिमांशु बताते हैं शुरू में थोड़ी उलझन हुई, लेकिन इस निराशा भरे माहौल में परिवार से बहुत बल मिला है। एक साथ रहने से भाई और सभी बहनों को जानने का मौका मिला। एक-दूसरे की भावनाओं को परिवार में रहने की वजह से ही समझ पाए। एक साथ रहते हैं तो बोरियत नहीं होती। परिवार में रहने से कई तरह की रेसिपी भी सीखने का मौका मिला। परिवार के साथ रहने की वजह से प्राणायाम, योग से लेकर परंपरागत खाने पीने की चीजों की ओर मुड़ पाए हैं। 

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