बादशाह हो या मजदूर, हर आदमी है बराबर

ईद उल अजहा पर शहर आस्था और उल्लास के रंग से सराबोर रहा। नए कपड़े पहने बच्चों और युव

JagranThu, 22 Jul 2021 03:15 AM (IST)
बादशाह हो या मजदूर, हर आदमी है बराबर

मेरठ,जेएनएन। ईद उल अजहा पर शहर आस्था और उल्लास के रंग से सराबोर रहा। नए कपड़े पहने बच्चों और युवाओं की टोलिया जगह-जगह पर्व की खुशिया मनाती नजर आईं। मौसम भी खुशगवार रहा। सुबह इबादत और कुर्बानी का दौर चला। सफेद कुर्ता पायजामा पहने इत्र लगाए कुछ लोग मस्जिदों में नमाज अदा करने पहुंचे। नमाजियों की भीड़ न लगे इसके लिए शहरभर में पुलिस तैनात रही। लोगों ने एक दूसरे को बकरीद की शुभकामनाएं दीं। कोतवाली स्थित शाही जामा मस्जिद में नमाज के बाद अपने संदेश में शहर काजी प्रोफेसर जैनुस साजिदीन ने कुर्बानी की अहमियत और समसामयिक हालात पर प्रकाश डाला। शहर काजी ने पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम की आखिरी हज यात्रा के दौरान ईद उल अजहा पर दिए गए संदेश का हवाला दिया। शहर काजी ने कहा कि दुनिया में सभी इंसान आदम की संतान हैं। बादशाह हो या मजदूर, गोरा हो या काला, किसी भी खानदान से संबधित हो, हर आदमी बराबर है। ऐसा कहकर पैगंबर साहब ने बिरादरीवाद और लोगों के घमंड को तार-तार कर दिया था। शहर काजी ने कहा कि आज हिंदू रहनुमा आरएसएस के प्रमुख भी कहते हैं कि सबका खून एक ही है।

उन्होंने शेर पढ़ा..

एक ही सफ में खड़े हो गए महमूद ओ अयाज।

न कोई बंदा रहा और न कोई बंदा नवाज।।

शहर काजी ने बताया कि महमूद गजनवी, जिसने मेरठ की जामा मस्जिद को तामीर करवाया था, वह जब नमाज पढ़ते थे तो उनके बगल में उनका गुलाम अयाज भी नमाज पढ़ता था। इस्लाम में दो बच्चों की हदबंदी मान्य नहीं

शाही जामा मस्जिद में सुबह से ही पुलिस बल तैनात रहा। शहर काजी जैनुस साजिदीन ने सुबह 7.30 बजे नमाज पढ़ाना आरंभ किया। बकरीद की नमाज अदा कराने के तौर-तरीके नमाजियों को बताए। नमाज के बाद शहर काजी ने खुत्बा पढ़ा। संदेश में उन्होंने कहा कि अल्लाह ने जिस प्राणी को पैदा किया है, उसके खाने-पीने का इंतजाम भी किया है। इसलिए अगर माली हालात को लेकर दो बच्चों की हदबंदी लगाने की बात है तो उसे इस्लाम नहीं मानता है। उन्होंने कहा कि देश का नागरिक होने के नाते हर व्यक्ति को सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं को प्राप्त करने का हक है। प्रदेश सरकार इसपर अगर रोक लगाती है तो वह गलत है। औरतों पर जुल्म न करें

शहर काजी ने कहा कि परिवारों के आपसी झगड़ों के मामले बढ़ गए हैं, यह बहुत गलत है। महिलाओं के साथ हमें बहुत इज्जत से पेश आना चाहिए। उनके सम्मान और खुशी का पूरा ध्यान रखना हमारा फर्ज है। इसके पहले शहर काजी ने कुर्बानी का मर्म बताया कि अल्लाह का हुक्म होने के कारण हजरत इब्राहिम के बेटे इस्माइल अपनी कुर्बानी देने को तुरंत राजी हो गए थे। जिस जानवर की कुर्बानी हम देते हैं, उसका गोश्त और खून अल्लाह तक नहीं पहुंचता है। केवल हुक्म तामील करने का जज्बा अल्लाह तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इतनी संख्या में जानवरों की कुर्बानी पर सवाल उठाते हैं। इस्लाम में अल्लाह के हुक्म के तहत कुर्बानी दी जाती है। उन्होंने कहा कि इस्लाम हर धर्म के पैगंबर की शिक्षाओं का अनुसरण करता है। इस्लाम साफ-सफाई पर बहुत जोर देता है। नमाज के पहले वजू किया जाता है। हमें अपने घर और आसपास साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

उधर, मस्जिद में अकीदतमंदों की संख्या 50 से अधिक रही लेकिन परिसर बड़ा होने के कारण आपस में दूरी रखते हुए नमाज पढ़ी गई। नमाज के बाद दुआ हुई। शहर काजी ने कोरोना महामारी से जिन लोगों का इंतकाल हो गया है, उनकी मगफिरत के लिए दुआ कराई। कोरोना महामारी जल्द समाप्त हो, इसके लिए भी दुआ की गई। नायब शहर काजी जैनुर राशिदीन, इकराम इलाही समेत समाज के प्रमुख लोगों ने नमाज पढ़ी। नमाज के बाद लोग कुर्बानी की तैयारियों में जुट गए। बुधवार को भी जानवरों की खरीदारी हुई। दिल्ली रोड स्थित शाही ईदगाह पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। ईदगाह जाने वाले मार्गो पर पुलिस ने आवागमन प्रतिबंधित कर दिया था। यहा पर मौलाना हस्सान कासमी ने पाच लोगों को नमाज अदा कराई।

हापुड़ रोड स्थित जुबैदा मस्जिद में कारी शफीकुर्रहमान ने नमाज अदा कराई। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि इस्लाम के बारे में हिंदुओं को सही जानकारी नहीं दी गई है। इसका वैमनस्य फैलाने वालों ने लाभ उठाया है। अगर हमारा पड़ोसी दुश्मन है तो भी इस्लाम उसके साथ अच्छा बर्ताव करने की सीख देता है। उन्होंने देश में अमन और शाति के लिए दुआ कराई। काच का पुल मोती मस्जिद में इमाम इमरान ने नमाज अदा कराई। खैरनगर हौज वाली मस्जिद, इमलियान, शाहपीर गेट, घटाघर जामा मस्जिद समेत शहर की सभी मस्जिदों में नमाज अदा हुई।

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