कोरोना का प्रकोप: गेहूं कटाई में भी महंगाई का तड़का, यूपी के इस जिले में ढूंढे नहीं मिल रहे श्रमिक

बुलंदशहर में गेहूं की कटाई को मजदूर नहीं मिल रहे।

Wheat Harvesting Becomes Expensive in UP 50 किलो गेहूं और 50 किलो भूसे की दर पर हो रही गेहूं की कटाई । कोरोना काल के चलते बाहरी राज्यों से नहीं आए युवक मजदूरों का हो रहा टोटा ।

Taruna TayalMon, 19 Apr 2021 11:25 PM (IST)

बुलंदशहर, जेएनएन। कोविड-19 के दूसरे चरण में श्रमिक घरों की ओर नहीं लौट रहे हैं। रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहरी राज्यों में नौकरी कर रहे युवा भी इस बार गेहूं कटाई के दौरान घर नहीं लौट रहे हैं। ऐसे में गेहूं कटाई के लिए काफी वक्त लग रहा है। श्रमिकों ने अपना मेहनताना बढ़ा दिया है।

गत वर्ष जहां 40 किलो गेहूं और 40 किलो भूसा पर प्रति बीघा गेहूं कटाई हो रही थी। इस बार 50 से 55 किलो गेहूं और इतना ही भूसा पर गेहूं कटाई की जा रही है। कोरोना संक्रमण के चलते औद्योगिक इकाइयां कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार जारी हैं। श्रमिकों और युवाओं को रोजगार खोने का भय सता रहा है। ऐसे में निजी संस्थानों में नौकरी कर रहे युवाओं ने घर की ओर रुख नहीं किया है। गत वर्षों में युवा गेहूं कटाई के दौरान परिवार की मदद करने के लिए घर लौट आते थे। इस बार ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में गेहूं कटाई का कार्य काफी प्रभावित है और कटाई करने के लिए श्रमिक भी नहीं मिल रहे हैं। श्रमिकों ने अपना मेहनताना बढ़ा दिया है।

सरकार ने इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति कुंतल की दर से घोषित किया है। जबकि 800 रुपये प्रति कुंतल भूसे की की कीमत है। ऐसे में एक बीघा गेहूं कटाई के लिए किसान को करीब 1300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही गेहूं की थ्रेसिंग के लिए भी किसान को कुंतल पर 10 से 14 किलो गेहूं खर्च करना पड़ रहा है। गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग में होने वाले खर्च से किसान परेशान हैं। अधिकांश किसान परिवारों ने स्वयं ही गेहूं कटाई की ठानी है।

क्या कहते हैं किसान

एक बीघा में तीन से चार कुंतल गेहूं का उत्पादन होता है। इसमें से 50 किलो गेहूं कटाई, 14 किलो थ्रेसिंग, 10 किलो क्रय केंद्र तक भाड़ा आदि खर्च आता है। ऐसे में उत्पादन से कटाई तक 60 प्रतिशत खर्च हो जाता है और 40 प्रतिशत फसल किसान को बचती है।

-रिंकू बगराई, खुर्जा

गेहूं की थ्रेसिंग, कटाई और मौसम की मार के चलते किसानों ने गेहूं की खेती कम कर दी है। कुछ किसान दो या तीन बीघा ही गेहूं की बुआई करते हैं ताकि घर खर्च के लिए खरीद न करनी पड़े।

-भारत भूषणनिजामपुर, खुर्जा 

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