West To Art: अब मेरठ शहर के पार्कों में दिखेंगी बेकार टायरों से बनी कुर्सियां, जानिए इसकी खासियत

West To Art मेरठ यह एक अच्‍छी पहल की गई है। अब बेकार टायरों से कुर्सियां और मेज बनायी जाएगी जिनको शहर के विभिन्न पार्कों में रखा जाएगा। इसकी शुरुआत कमिश्नरी पार्क चौराहे से हो चुकी है। मेरठ नगर निगम ने इसकी शुरुआत की है।

Prem Dutt BhattPublish:Mon, 06 Dec 2021 03:30 PM (IST) Updated:Mon, 06 Dec 2021 04:00 PM (IST)
West To Art: अब मेरठ शहर के पार्कों में दिखेंगी बेकार टायरों से बनी कुर्सियां, जानिए इसकी खासियत
West To Art: अब मेरठ शहर के पार्कों में दिखेंगी बेकार टायरों से बनी कुर्सियां, जानिए इसकी खासियत

मेरठ, जागरण संवाददाता। West To Art मेरठ शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने की दिशा में नगर निगम वेस्ट टू आर्ट (कबाड़ सामग्री की कलाकृति) का सहारा लेगा। अर्थात निष्प्रयोज्य वस्तु को कचरे में फेंकने बजाए उसके उपयोग पर जोर दिया जाएगा। इस कड़ी में अब बेकार टायरों से कुर्सियां व मेज बनायी जाएगी, जिनको शहर के विभिन्न पार्कों में रखा जाएगा। इसकी शुरुआत कमिश्नरी पार्क चौराहे से हो चुकी है।

हर साल बेकार टायरों की संख्‍या

नगर निगम के पास 250 से अधिक वाहन हैं। जिनसे हर साल बेकार टायर निकलते हैं। ये बेकार टायरों से अब कुर्सी और मेज बनाई जाएगी। यह काम नगर निगम का स्वच्छता सेल कराएगा। दरअसल, स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में वेस्ट टू आर्ट के तहत किए गए कार्यों का भी सर्वेक्षण होना है, जिसके अंक भी निर्धारित हैं। नगर निगम ने पिछले सर्वेक्षण के दौरान यूनिवर्सिटी रोड पर बेकार टायरों से अस्थायी कूड़ाघर समाप्त करके सजावट की थी।

ऐसे होता है कुर्सी-मेज का निर्माण

बेकार टायरों से कुर्सी-मेज बनाना बहुत आसान है। एक कुर्सी बनाने के लिए तीन टायर, उनको आपस में जोडऩे के लिए नट-बोल्ट, टायर को रंग-बिरंगा बनाने के लिए पेंट, जमीन में रखने के लिए तीन टायरों को आपस में जोडऩे के बाद निचले हिस्से में लोहे का स्टैंड की आवश्यकता होती है। तीन टायरों को जोडऩे के बाद ऊपर के हिस्से में बैक लाइट की मजबूत सीट लगाई जाती है। एक कुर्सी बनाने में लगभग पांच हजार रुपये का खर्च आता है। कुर्सी के लिए छोटे टायर की जरूरत होती है। जबकि बड़े टायरों को ठीक इसी तरह जोड़कर मेज तैयार की जाती है।