हम बने तुम बने एक दूजे के लिए..

सात फेरों के बंधन में बंधे जीवनसाथियों के लिए एक दूजे के साथ से बढ़कर कुछ

JagranSun, 24 Oct 2021 06:35 AM (IST)
हम बने तुम बने एक दूजे के लिए..

मेरठ,जेएनएन। सात फेरों के बंधन में बंधे जीवनसाथियों के लिए एक दूजे के साथ से बढ़कर कुछ भी नहीं है। हर सुख-दुख में साथ खड़े पति-पत्नी का पावन त्योहार है करवाचौथ। इसमें पत्नी ही नहीं पति भी अपनी जीवन संगिनी की लंबी उम्र की कामना करते हुए करवाचौथ का व्रत रख रहे हैं।

मायके की साड़ी में ही होता है पूजन

आज भी पारंपरिक तरीके से करवाचौथ का व्रत किया जाता है। मैं वही साड़ी पहनकर करवाचौथ की कथा सुनती और चंद्रदर्शन करती हूं, जिसको पहनकर शादी के बाद विदा होकर ससुराल आई थी। इसलिए उस साड़ी को शादी के 29 साल बाद भी संभाल कर रखा हुआ है। करवाचौथ पूजन और चंद्रदर्शन के बाद पानी पीकर व्रत खोलते हैं, और पति के चरण छूकर आशीर्वाद लेते हैं।

-रजनी रानी शंखधर-कैलाश चंद्र, शर्मा शास्त्रीनगर लंबी उम्र के लिए दोनों रखते हैं व्रत

शादी को 31 साल हो गए और हम दोनों ही एक दूसरे की लंबी उम्र की कामना करते हुए करवाचौथ का व्रत रखते हैं। प्रदीप भी मेरे लिए करवाचौथ का व्रत करते हैं। यह बात मुझे शादी के कई साल बाद दोस्तों से मालूम हुई। शाम को कथा सुनने के बाद हम दोनों मंदिर जाते हैं, और फिर चंद्रमा देखकर व्रत खोलते हैं।

-डा. किरण प्रदीप-प्रदीप कौशिक, गढ़ रोड दोनों का साथ जरूरी

शादी को 18 साल हो गए हैं। शुरुआत में तो पत्नी ही करवाचौथ का व्रत रखती थीं। लेकिन पिछले दस सालों से मैं भी उनके साथ यह व्रत कर रहा हूं। जब पत्नी पति के लिए दिनभर निर्जला व्रत रख सकती हैं, तो पति क्यों नहीं। दोनों साथ में कथा सुनते हैं, और फिर चंद्रदर्शन के बाद व्रत खोलते हैं।

-संजय कुमार शर्मा-रश्मि शर्मा, नौचंदी शादी के दस साल बाद रखा पत्नी के लिए व्रत

शादी को 33 साल हो गए हैं। लेकिन मैंने पत्नी के लिए शादी के दस साल बाद करवाचौथ का व्रत रखना शुरू किया। पति-पत्नी गाड़ी के दो पहिए हैं। जितना महत्व पति का है, उतना ही पत्नी का भी है। इसलिए दोनों का साथ एक दूसरे के लिए जरूरी है। इसी सोच के साथ मैंने भी करवाचौथ का व्रत रखना शुरू किया।

-संजीव अग्रवाल-हेमा अग्रवाल, बुढ़ाना गेट पहली करवाचौथ है मेरी

शादी के बाद यह मेरी पहली करवाचौथ है। व्रत की शुरुआत सरगी से होगी। इसके बाद शाम को शादी का लहंगा पहनकर करवाचौथ की कथा सुनने और थाली बदलने की परंपरा निभाई जाएगी। चंद्रमा देखने के बाद व्रत खोलकर बाहर डिनर का प्लान है। शादी के बाद पहली करवाचौथ खास होती है।

-समृद्धि-सुगम बाटला, साकेत यह मेरी पहली करवाचौथ है। इसके लिए काफी समय से तैयारियां चल रही हैं। आज का दिन दोनों के लिए खास है। दोनों ने ही एक दूसरे के लिए खास उपहार पहले ही प्लान कर लिया था। सुबह सरगी के बाद व्रत शुरू होगा। शाम को चंद्रदर्शन के बाद पारंपरिक तरीके से ही व्रत खोला जाएगा।

-साम्या-उत्सव दुबे, मवाना

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