बुलंदशहर : खुद प्यासा है तीस साल पहले बना रजवाहा, टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी, किसान परेशान

बुलंदशहर के बीबीनगर क्षेत्र में लखावटी ब्रांच की तिबड़ा झाल से निकलने वाला रजवाहा कई गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए तीन दशक पहले बनाया गया था। सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण इसका पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे किसान परेशान हैं।

Taruna TayalMon, 26 Jul 2021 06:05 PM (IST)
बुलंदशहर के बीबीनगर क्षेत्र के सैदपुर गांव में सूखा पड़ा रजवाहा

बुलंदशहर, जेएनएन। धरती सूखी है, रजवाहा खुद प्यासा है और किसान मायूस हैं। यह हकीकत है बीबीनगर क्षेत्र में आधा दर्जन गांवों की कृषि भूमि की सिंचाई के लिए बनाए गए रजवाहे की। रजवाहे में टेल तक पानी नहीं पहुंच पाने से किसानों को धान की फसल की सिंचाई के लिए एक बार फिर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

वर्ष 1990 में बनवाया गया था रजवाहा

मध्य गंग नहर की लखावटी ब्रांच की तिबड़ा झाल से निकलने वाला रजवाहा तिबड़ा, भैंसाखुर, लुखलारा, सैदपुर, मादपुर, नीमापाटी, फतेहपुर व बबुपुर आदि गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सिंचाई विभाग ने वर्ष 1990 में बनवाया गया था। किसानों का कहना है कि अपने निर्माण से अभी तक उक्त रजवाहे में टेल तक पानी नहीं पहुंचा है। वर्तमान सत्र में जेसीबी मशीन द्वारा सफाई कराए जाने से किसानों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें धान की रोपाई व सिंचाई के लिए रजवाहे से पानी मिल सकेगा। उनकी यह उम्मीद एक बार फिर टूट गई और रजवाहा सूखा ही रह गया। इस विषय में सैदपुर निवासी किसान जगदीश पाल का कहना है कि पानी न पहुंच पाने के कारण रजवाहा सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। इससे किसानों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही सरकार की हर खेत को पानी योजना को भी पलीता लग रहा है।

किसान बीरपाल सिंह का कहना है कि संबंधित अधिकारियों के रजवाहे में पानी नहीं आने की समस्या से आंखें बंद किए रहना समस्या का हल नहीं है। सिंचाई विभाग को चाहिए कि वह पानी टेल तक नहीं पहुंच पाने के कारणों को चिन्हित कर उनका निराकरण कराए ताकि किसानों को सिंचाई सुविधा मिल सके। ग्राम विकास संघर्ष मोर्चा सैदपुर के संयोजक सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि उक्त रजवाहे के विषय में सिंचाई विभाग व जनप्रतिनिधियों से अनेक बार शिकायत कर समाधान की मांग की जा चुकी है लेकिन नतीजा सिफर है। अगर जल्द ही कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है तो किसान आंदोलन की राह पर चलने को मजबूर होगा।

 

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