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मेरठ : तेज आंधी और बारिश से टूटे तार, गिरे पेड़, घंटों बिजली आपूर्ति ठप

गुरुवार की शाम को मेरठ में कुछ देर की बारिश से हाहाकार मच गया।

मेरठ में आंधी और पानी से कई पेड़ जमीदोज हो गए। पेड़ों की शाखाएं टूट कर बिजली लाइनों पर गिर गईं। जगह-जगह लाइनें लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। बिजली आपूर्ति ठप होते ही शहर में हाहाकार मच गया। कई घंटों में जाकर बिजली सप्‍लाई चालू हो सकी।

Prem Dutt BhattThu, 06 May 2021 11:55 PM (IST)

मेरठ, जेएनएन। मेरठ में गुरुवार शाम को अचानक आई आंधी-पानी से कई पेड़ जमीदोज हो गए। पेड़ों की शाखाएं टूट कर बिजली लाइनों पर गिर गईं। जगह-जगह लाइनें लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। बिजली आपूर्ति ठप होते ही शहर में हाहाकार मच गया। जहां अस्पतालों व आक्सीजन प्लांटों की आपूर्ति ठप होने से महकमे के हाथ पांव फूल गए तो वहीं, होम आइसोलेशन में मौजूद मरीज कराह उठे। बिजली को लेकर देर रात तक हाहाकार मचा रहा। शाम 4.30 बजे से मौसम खराब हुआ। जिसके बाद से बिजली व्यवस्था धड़ाम हो गई।

ये इलाके हुए ज्‍यादा प्रभावित

परतापुर से लेकर मोदीपुरम तक, जागृति विहार से लेकर गंगानगर तक लगभग पूरे शहर में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। यहां तक कि मेडिकल कालेज समेत कई अस्पताल व आक्सीजन प्लांटों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। लोगों के फोन घनघनाने शुरू हुए तो नगरीय विद्युत वितरण की टीमें सक्रिय हुईं। सबसे पहले अस्पतालों और आक्सीजन प्लांटों की आपूर्ति बहाल की गई। करीब एक से दो घंटे लग गए। इसके बाद गंगानगर, एमईएस, सोफीपुर, नगलासेखू, माधवपुरम, हापुड़ रोड बाइपास, शताब्दीनगर, सिविल लाइंस, साकेत, मानसरोवर, पल्लवपुरम, रूड़की रोड, घंटाघर क्षेत्र की आपूर्ति में आए व्यवधान दूर करने में बिजली टीमें जुटीं। रात नौ बजे के बाद एक-एक क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बहाल होनी शुरू हुई। इसमें देर रात तक बिजली टीमें जुटी रहीं।

इन स्थानों पर पेड़ व शाखाएं गिरने की रही सूचना

नगर निगम के उद्यान अनुभाग के अनुसार पुलिस लाइन के गेट के सामने और गंगानगर में सड़क पर बड़े पेड़ गिर गए। विक्टोरिया पार्क के पास पेड़ की कई शाखाएं टूट कर बिजली लाइन पर गिर गईं। सर्किट हाउस के समीप एक पेड़ की डाल बिजली लाइन पर गिरी। शताब्दीनगर में दो पोल टूट गए और पेड़ों की शाखाएं बिजली लाइन पर गिरीं। मंगलपांडे नगर में यूनिवर्सिटी रोड पर पेड़ गिरने की सूचना रही। हालांकि शहर के अन्य हिस्सों में भी पेड़ व शाखाएं गिरी हैं। जिनकी सूचना निगम तक नहीं पहुंची।

विभागों की अनदेखी से हर बार खड़ी होती समस्या

पेड़ और शाखाएं गिरने से सबसे ज्यादा ऊर्जा निगम को नुकसान होता है। क्योंकि इससे पोल टूटते हैं। बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त होती है। इसके बावजूद पेड़ों की छटाई में लापरवाही बरती जा रही है। जबकि यह काम ऊर्जा निगम खुद करता है। गिरने की स्थिति वाले पेड़ों को काटने की अनुमति वन विभाग देता है। लेकिन काफी दिनों से ऐसे पेड़ो का चिंहाकन ही नहीं हुआ।

इनका कहना है

शाम 4.30 बजे के बाद आंधी-पानी से बिजली आपूर्ति में व्यवधान आया। सबसे पहले अस्पतालों व आक्सीजन प्लांटों की आपूर्ति बहाल की गई। इसके साथ शहर के अन्य इलाकों की। कई स्थानों पर पेड़ व शाखाएं गिरीं हैं। जिनको हटाया जा रहा है। क्षतिग्रस्त लाइनों व टूटे पोल को सुधारने में समय लगा। रात 10.30 बजे तक अधिकांश क्षेत्र की आपूर्ति बहाल कर दी गई है।

- विजय पाल, अधीक्षण अभियंता, शहर।

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