मुठभेड़ की खबर सुनकर मन खुश है, सुकून की नींद आएगी

मुठभेड़ की खबर सुनकर मन खुश है, सुकून की नींद आएगी

गुरुवार की सुबह शहीद डिप्टी जेलर अनिल त्यागी के स्वजन के लिए खुशी लेकर आई।

JagranFri, 05 Mar 2021 03:45 AM (IST)

मेरठ, जेएनएन। गुरुवार की सुबह शहीद डिप्टी जेलर अनिल त्यागी के स्वजन के लिए खुशी लेकर आई। डिप्टी जेलर की हत्या करने वाले दोनों शूटर को एसटीएफ ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया। इसकी जानकारी मिलते ही स्वजन की आंखें नम हो गई। उन्होंने कहा कि आज खुशी बहुत है। रात को सुकून की नींद आएगी। हालांकि सरकार की बेरुखी का गम भी चेहरे पर दिखाई दिया।

नौचंदी थाना क्षेत्र के नेहरू नगर निवासी अनिल त्यागी 2013 में वाराणसी में डिप्टी जेलर थे। 23 नवंबर 13 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दिनदहाड़े हुई हत्या से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। इस मामले में मुन्ना बजरंगी और मुख्तार अंसारी का नाम सामने आया था। बुधवार देर रात प्रयागराज के नैनी थाना क्षेत्र में एसटीएफ ने मुठभेड़ में दो बदमाशों को ढेर कर दिया। उनकी पहचान भदोही जिले के गोपीगंज थाना बड़ा शिव मंदिर निवासी वकील पांडेय उर्फ राजू और गोपीगंज खुर्द गांव निवासी अमजद के रूप में हुई। दोनों ने ही डिप्टी जेलर की हत्या की थी। डिप्टी जेलर के पिता राजेंद्र सिंह त्यागी ने बताया कि गुरुवार सुबह टीवी पर समाचार देखकर उनको जानकारी हुई। उन्होंने बताया कि आरोपितों के ढेर होने की खबर सुनते ही बहुत खुशी हुई। उन्होंने मुठभेड़ करने वाली टीम को भी बधाई दी।

सरकार की बेरुखी से मन दुखी

राजेंद्र त्यागी ने बताया कि घटना के बाद कई मंत्री घर आए थे। उन्होंने बहू को नौकरी का वादा किया था, जो पूरा हो गया। इसके साथ ही 20 लाख रुपये की मदद का आश्वासन भी मिला था, लेकिन आíथक मदद नहीं मिली। उन्होंने गृह सचिव से लेकर डीएम और कमिश्नर तक से गुहार लगा ली, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सैकड़ों चिट्ठी लिख चुके हैं। सरकार अपने वादे को भूल गई है। इससे मन दुखी होता है।

ईमानदारी की सजा मिली थी, अब इंसाफ हुआ

डिप्टी जेलर की पत्नी डा. अनुभा त्यागी (डीआइजी जेल, ओएसडी) ने कहा कि ईमानदारी से नौकरी करने की सजा पति को मिली थी। घटना के बाद जिदगी ही बदल गई थी। लंबे समय बाद इंसाफ हुआ है। प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए एसटीएफ टीम को भी बधाई दी। ऐसे ही बदमाशों के खिलाफ अभियान चलते रहना चाहिए, ताकि फिर कोई पुलिसकर्मी शहीद ना हो। उन्होंने बताया कि पति की बहादुरी के चलते ही उनके जाने के बाद 15 अगस्त 14 को राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला था। बच्चों को भी वह ईमानदारी का पाठ पढ़ाती हैं।

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