पाइन डिव के पूर्व जनरल्स ने देखी अपनी धरोहर

मेरठ, जेएनएन। वर्ष 1971 के युद्ध में हुई जीत का जश्न मनाने के लिए पाइन डिव में हर साल जेसोर दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विजय के 48 वर्ष पूरे हो चुके हैं। जेसोर दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने मेरठ पहुंचे पाइन डिव के कुछ पुराने जनरल ऑफिसर इन कमांडिंग ने शुक्रवार को छावनी में पाइन डिव की ओर से बनाए गए आर्मी अवेयरनेस सेंटर 'धरोहर' का भ्रमण किया। धरोहर में बनाई गई प्रतिमाएं और युद्ध इतिहास के साथ ही सेना के हीरोज की कहानी की प्रस्तुति सभी को खूब पसंद आई। सेना के खर युद्ध की जानकारी के साथ ही सैनिक जीवन, परमवीर चक्र के साथ ही मेरठ का पुरातात्विक व सैन्य इतिहास और पूर्व सैनिकों से संबंधित जानकारियों को सभी ने सराहा।

साझा की पुरानी यादें भी

धरोहर देखने पहुंचे पाइन डिव के पूर्व जीओसी में लेफ्टिनेंट जनरल वाईके वडेरा व पत्नी लता वडेरा, लेफ्टिनेंट जनरल अरुण कुमार चोपड़ा, लेफ्टिनेंट जनरल एसके शर्मा सपत्नीक और मेजर जनरल एके सप्रा पहुंचे। धरोहर में वर्ष 1965 और वर्ष 1971 के युद्ध पर चर्चा करने के साथ ही भारतीय सेना के हीरो रहे फील्ड मार्शल जनरल सैम मानेकशॉ और जनरल केएम करियप्पा के योगदान पर भी चर्चा की। तस्वीरों के साथ ही वर्ष 1971 के युद्ध में पाइन डिव के जेसोर फतह को भी सभी ने याद किया और शहीदों को नमन किया।

आज देंगे शहीदों को श्रद्धांजलि

पाइन डिव की ओर से शनिवार सात दिसंबर को 48वां जेसोर दिवस मनाया जा रहा है। पाइन डिव के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल मानिक कुमार दास की अगुवाई में डिव के पूर्व जीओसी, पाइन डिव के वरिष्ठ अफसर व जवान शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। इस कार्यक्रम में डिवीजन के पूर्व जीओसी सहित उनके परिजन भी कार्यक्रम में हिस्सा लेने मेरठ पहुंचे हैं।

बेहद जिंदादिल थे फील्ड मार्शल व जनरल करियप्पा

ले. जनरल वाईके वडेरा की पत्नी लता वडेरा ने पुरानी याद ताजा करते हुए बताया कि जनरल वडेरा के वर्ष 1990 से 1992 में वेलिंगटन स्थित स्टाफ कॉलेज के कार्यकाल के दौरान उनकी मुलाकात फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और जनरल केएम करियप्पा के साथ हुई थी। सेना के सफलतम जनरल होने के साथ ही दोनों बेहद जिंदादिल इंसान भी थे। जनरल करियप्पा के पुत्र भी उन्हीं दिनों स्टाफ कॉलेज में ही सेवाएं दे रहे थे। एक कार्यक्रम में पहुंचे जनरल करियप्पा को सीढि़यों पर चढ़ना था। अधिक उम्र होने के कारण उन्हें एक सीढ़ी पर दोनों पैर एक-एक कर रखते हुए आगे बढ़ना था लेकिन उन्होंने मना कर दिया। दो सेनिकों के सहयोग से जनरल करियप्पा एक-एक कदम बढ़ाते हुए ऊपर गए। उसी तरह फील्ड मार्शल मानेकशॉ भी थे जिनकी नजर सेना के बाहर भी बेहद पारखी थी और हर छोटी-छोटी चीज का बेहद ख्याल रखते थे। वह जहां भी खड़े होते पूरी तरह से सीधे होकर खड़े होते थे।

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