सिटी बस अड्डा तो बना नहीं, कूड़ा डंपिंग ग्राउंड बन गया

मेरठ : शहर में जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन के अंतर्गत चल रहीं सिटी बसों के लिए लोहियानगर में सिंगापुर की तर्ज पर बस अड्डा बनाया जाना है। इस पर करीब 20 करोड़ 75 लाख रुपये खर्च होने हैं। राज्य शहरी विकास एजेंसी ने 15 मार्च 2018 को प्लान पर मुहर भी लगा दी थी, लेकिन अब यहां कूड़ा डंपिग ग्राउंड बना दिया गया है। क्योंकि शहर में कहीं ओर कूड़ा डालने के लिए जमीन नहीं बची है। नगर निगम प्रशासन ने गांवड़ी में कूड़ा डालने का प्रयास किया तो ग्रामीण विरोध में उतर आए।

2009 से ही सोहराब गेट बस अड्डे से इन बसों का संचालन किया जा रहा है। यहां पर रोडवेज और सिटी बसों की संख्या अधिक होने से संचालन सही से नहीं हो पाता है। इसके चलते ही सिटी बसों के लिए अलग अड्डे के निर्माण की योजना बनी थी। साथ ही सरकार का प्रयास है कि इन बसों को इलेक्ट्रिक बसों में बदल दिया जाए। क्योंकि अगले साल ये बसें एनजीटी के दस साल वाले आदेश के दायरे में आ जाएंगी। हालांकि अभी तक बस अड्डे का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।

लखनऊ में फाइनल हुआ था प्लान

15 मार्च 2018 को लखनऊ में सूडा राज्य शहरी विकास एजेंसी कार्यालय में तत्कालीन एमडी संदीप लाहा, कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज के परियोजना अधिकारी विनोद कुमार और वरिष्ठ स्थानिक अभियंता अमित कुमार राजपूत और आर्किटेक्ट की बैठक के बाद प्लान फाइनल कर सिटी ट्रांसपोर्ट लिमिटेड निदेशक को दिया गया था। प्लान में ओपन और जी प्लस टू-डिजाइन तय हुआ था। वहीं इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिग प्वाइंट की व्यवस्था अलग से तय की गई थी।

एक नजर सिटी ट्रांसपोर्ट बस अड्डे पर

कुल बसें - 128

वॉल्वो बसें - आठ

इन रुटों पर चलती हैं

मोदीपुरम, मोदीनगर, परतापुर, बेगमपुल, सरधना, लावड़, सिटी स्टेशन, करनावल, भोला सतवई आदि रूटों पर संचालित किया जाता है। यह सिटी ट्रांसपोर्ट की भुमि है। अगर वहां कूड़ा डाला जा रहा है, तो बुधवार को नगर निगम को पत्र जारी किया जाएगा। बस अड्डा बनाने का मामला शासन में चल रहा है।

विजय कुमार, एमडी, सिटी ट्रांसपोर्ट

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