यीशु के रूपांतरण की घटना सुन आत्ममुग्ध हुए कलीसियायी

यीशु के रूपांतरण की घटना सुन आत्ममुग्ध हुए कलीसियायी

चालीसा के दूसरे रविवार को रुड़की रोड स्थित सेंट जोजफ चर्च में विशेष प्रार्थना हुई। सुबह सात नौ और शाम को पांच बजे प्रार्थना हुई। सुबह के सत्र में प्रार्थना का संचालन फादर जान चिमन ने किया।

JagranMon, 01 Mar 2021 06:00 AM (IST)

मेरठ, जेएनएन। चालीसा के दूसरे रविवार को रुड़की रोड स्थित सेंट जोजफ चर्च में विशेष प्रार्थना हुई। सुबह सात, नौ और शाम को पांच बजे प्रार्थना हुई। सुबह के सत्र में प्रार्थना का संचालन फादर जान चिमन ने किया। कहा कि प्रार्थना, परोपकार और उपवास चालीसा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। बताया कि यीशु ने अपने दुख भोग और क्रूस पर लटकाए जाने की घटना के बारे में अपने शिष्यों को तीन बार बताया था। पर वह सहज ही विश्वास नहीं करते थे। उनका मानना था कि यीशु उन्हें रोम की परतंत्रता से निजात दिलाएंगे। ऐसे में जब वह अपनी मृत्यु के बारे में बताते थे तो अनुयायी दुखी हो जाते थे। क्रूस पर लटकाए जाने से कुछ दिन पहले यीशु अपने तीन शिष्यों संत पतरस, योहन और याकूब इजरायल के एक ऊंचे तबोर पर्वत पर ले जाते हैं। वहां पर यीशु ध्यान मग्न हो जाते हैं। इसके साथ उनका रूपांतरण हो जाता है। उनके तीनों शिष्य देखते हैं यीशु के मुखमंडल से तेज प्रकाश निकल रहा है, उनके वस्त्र बेहद उजले हो गए हैं। तीनों शिष्यों को यीशु मूसा और नबी एलियस से बात करते हुए नजर आते हैं। इसी बीच एक बादल यीशु के ऊपर छा जाता है आकाशवाणी होती है कि यह (यीशु) मेरा प्रिय पुत्र है इसकी सुनो। यह सब दृश्य देखकर तीनों शिष्य भय और आश्चर्य में डूब जाते हैं। फादर चिमन ने बताया कि प्रभु यीशु अपने शिष्यों को अपनी वास्तविकता बताना चाहते थे इसलिए अपने तीन खास शिष्यों को तबोर पर्वत पर ले गए थे। उनके शिष्य उन्हें आम इंसान समझते थे। वहीं, यीशु अपने धरती पर आने का वास्तविक लक्ष्य बताना चाहते थे कि वह अपने बलिदान से लोगों को पापों से मुक्ति दिलाएंगे। शाम को फादर थामस ने प्रार्थना का संचालन किया।

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