लिवर का रखें ख्याल, हेपेटाइटिस का न होने दें वार

हेपेटाइटिस के अधिकांश मामले अचानक रक्त की जांच कराने या किसी अन्य समस्या की ज

JagranThu, 29 Jul 2021 03:15 AM (IST)
लिवर का रखें ख्याल, हेपेटाइटिस का न होने दें वार

मेरठ, जेएनएन। हेपेटाइटिस के अधिकांश मामले अचानक रक्त की जांच कराने या किसी अन्य समस्या की जांच कराने पर सामने आते हैं। हेपेटाइटिस-बी व सी खासतौर पर साइलेट किलर की तरह लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। कई बार इससे बीमार मरीज की हालत बिगड़ने पर ही इनका पता चलता है। मेडिकल कालेज की हेपेटाइटिस ओपीडी में मेरठ के आसपास के कुछ इलाकों से आने वाले मरीजों में हेपेटाइटिस-बी व सी के सामान्य से कुछ अधिक मामले हैं। ऐसे में इसे लेकर सतर्कता बरतनी जरूरी है।

हेपेटाइटिस बीमारी की अनभिज्ञता खत्म करने के लिए हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. अरविंद कुमार का कहना है कि लिवर शरीर के सबसे अहम अंगों में एक है। हेपेटाइटिस दूषित खानपान और असुरक्षित व्यवहार जैसे हेपेटाइटिस ग्रसित द्वारा इस्तेमाल की हुई सुई-ब्लेड, कैंची प्रयोग आदि से सबसे ज्यादा खतरा रहता है। हेपेटाइटिस बी व सी असुरक्षित व्यवहार की वजह से होता है। इसे ग्रामीण लोग काला पीलिया के नाम से जानते हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस एक्यूट और क्रानिक दो प्रकार का होता है। एक्यूट हेपेटाइटिस पीलिया की तरह होकर कुछ समय बाद ठीक हो जाता है, लेकिन क्रानिक हेपेटाइटिस मरीज को लंबे समय तक प्रभावित करता है। अगर समय रहते इसका पता न चले तो सिरोसिस व कैंसर तक होने की आशंका रहती है। पीलिया के लक्षण दिखाए देने पर फौरन चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि अधिकांश मामले एसिम्टोमैटिक होने से मरीज इस समस्या से अनजान रहता है। ऐसे में बीमारी का दायरा और बढ़ने से मरीज की समस्या बढ़ जाती है। हेपेटाइटिस के कुछ लक्षण जैसे भूख कम होना, थोड़ा काम करने पर ही थकान महसूस होना, आंखों में पीलापन, त्वचा में पीलापन आदि से इसे पहचानें। मेडिकल कालेज में विशेष तौर पर हेपेटाइटिस बी व सी के उन्मूलन के लिए सरकार की पहल से उपचार व जांच निश्शुल्क उपलब्ध है। हेपेटाइटिस-बी व सी को लेकर की जनजागरूकता

विश्व हेपेटाइटिस दिवस को लेकर मेडिकल कालेज में बुधवार को मेडिसिन विभाग की ओर से जनजागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। मेडिकल कालेज के छात्रों को सेमिनार में अधीक्षक (एसआइसी) डा. एनके तिवारी की अगुवाई में हेपेटाइटिस बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही मेडिकल विभाग से मेडिसिन ओपीडी व अन्य ओपीडी से होकर एक जागरूकता रैली निकाली गई। इस दौरान डा. योगिता सिंह, डा. संध्या, डा. श्वेता, डा. स्नेहा, डा. विनोद त्यागी आदि मौजूद रहे।

अनियंत्रित खानपान बंद कर स्वस्थ रखें लिवर : हेपेटाइटिस अर्थात लिवर में सूजन वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोगों को पीड़ित कर रहा है। खराब जीवनशैली, अनियंत्रित खान-पान, शराब के अधिक सेवन समेत अनेक कारणों से विभिन्न फैटी लिवर, लिवर का बढ़ना, लिवर में सूजन, लिवर का कम काम करना आदि समस्याएं हो रही हैं। यह कहना है आयुकेयर आयुर्वेद मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल के डा. धन्वंतरि त्यागी का। उन्होंने बताया कि लिवर प्रभावित होने पर पाइल्स (बवासीर) रोग की आशंका सर्वाधिक होती है। दर्द निवारक, कब्जनाशक दवाइयों, एसिडिटी की दवाइयों के अंधाधुंध सेवन से लीवर पर काफी दबाव पड़ता है तथा जिससे गुर्दे को अधिक काम करना पड़ता है। यदि ऐसी स्थिति लगातार बनी रहे तो गुर्दे कम काम करने लगते हैं। इसके अतिरिक्त वायरस (हेपेटाइटिस वायरस) के कारण भी लिवर रोग हो जाते हैं। छात्रों को हेपेटाइटिस रोग के बारे में किया जागरूक : बुधवार को कंकरखेड़ा स्थित एमडी पैरामेडिकल व मैनेजमेट इंस्टीट्यूट के परिसर में हेपेटाइटिस दिवस के उपलक्ष्य में एक परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें संस्थान के काय चिकित्सक डा. रविदत्त भाटिया ने मुख्य वक्ता के तौर पर हेपेटाइटिस के विभिन्न प्रकार के बारे में जानकारी दी। इस दौरान संस्थान के छात्र व अन्य चिकित्सक मौजूद रहे। संस्थान के चेयरमैन डा. मनीष पाठक ने इस रोग की रोकथाम को लेकर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान संस्थान की प्रचार्या डा. दिव्या पाठक, सृष्टि नैन, सुमित सिंह, लाइबा सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।

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