मेरठ में खेल विश्वविद्यालय अच्छी सौगात, पर नए खिलाड़ियों के लिए कालेज जरूरी

तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने के बाद मेरठ से एक से बढ़कर एक क्रिकेटर निकले। उसी प्रकार अन्नू रानी प्रियंका और सीमा पूनिया जैसी एथलीटों के नक्शेकदम पर चलते हुए नई लड़कियां ट्रैक एंड फील्ड पर छाने को बेताब हैं।

Himanshu DwivediFri, 30 Jul 2021 09:55 AM (IST)
मेरठ से कई लड़कियों में एथलीट बनने का क्रेज बढ़ा।

जागरण संवाददाता, मेरठ। पश्चिमी उप्र के खिलाड़ियों ने विपरीत परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय पदकों का अंबार लगाया है। इसका असर यह कि नई प्रतिभाओं की नर्सरी तेजी से उभरी। तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने के बाद मेरठ से एक से बढ़कर एक क्रिकेटर निकले। उसी प्रकार अन्नू रानी, प्रियंका और सीमा पूनिया जैसी एथलीटों के नक्शेकदम पर चलते हुए नई लड़कियां ट्रैक एंड फील्ड पर छाने को बेताब हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मेरठ में खेल विश्वविद्यालय बनने के बाद खिलाड़ियों का पलायन रुकेगा। वो विश्व चैंपियनशिप से लेकर ओलिंपिक खेलों तक ढेरों पदक जीतेंगे।

स्टेडियम में स्तरीय जिम लगा तो फिटनेस सुधरी

कैलाश प्रकाश स्टेडियम में पिछले पांच साल में सबसे बड़े सुधार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर के जिम की उपलब्धता है। पूर्व क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी आले हैदर ने आधुनिक जिम सिस्टम लगवाया, जिसमें खिलाड़ी अपनी ट्रेनिंग के मुताबिक फिटेनस मेंटेन कर रहे हैं। कोच बताते हैं कि स्पर्धा में प्रतिभाग करने के बाद कई बार खिलाड़ियों को अपनी मांसपेशियां टोन-अप करनी पड़ती है। इसके लिए जिम बेहद जरूरी है।

तराशने का मिलेगा मौका

उत्तर प्रदेश में कोई खेल विवि नहीं है। अब, मेरठ के सरधना में पहला विश्वविद्यालय बनने जा रहा है। नई दिल्ली और मणिपुर में नया विवि बन रहा है, जबकि पंजाब में पटियाला विवि की स्वर्णिम कहानी सबके सामने है। यहां एक से बढ़कर एक खिलाड़ी निकले। पटियाला विवि मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्राफी लगातार जीत रहा है, जिसमें कई खेल शामिल होते हैं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि खेल विवि से सीनियर स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों को स्टेडियम, कोच व स्पोर्ट्स इंजरी का इलाज मिल जाएगा, लेकिन कम उम्र में खिलाड़ियों को तराशने के लिए स्पोर्ट्स कालेज ज्यादा जरूरी है।

मोबाइल पर अपनी रिकाडिंग देख सुधार रहे प्रदर्शन

देश के सर्वश्रेष्ठ जंपरों में शुमार रहे अन्नू कुमार बताते हैं कि उस दौर में जुनून वाले एथलीट हैंडीकैम में अपना खेल रिकार्ड कर घर पर त्रुटियां सुधारते थे। अब नई पीढ़ी सीखने में ज्यादा तेज है। नए खिलाड़ी न सिर्फ यू-ट्यूब में चैंपियनों का वीडियो देखकर सीख रहे हैं, बल्कि अपनी भी रिकाìडग करते हैं। दौड़ने, थ्रो, व जंप समेत अन्य स्पर्धाओं का स्लो मोशन में रिकार्ड पर कमियों का विश्लेषण करते हुए कोच से सुधार की सीख लेते हैं।

सर, मुङो दीदी की तरह थ्रोअर बनना है

बीते बरसों में मेरठ में क्रिकेट, निशानेबाजी, कुश्ती एवं बाक्सिंग के साथ ही अब एथलेक्टिस ने भी फर्राटा भरा है। कैलाश प्रकाश स्टेडियम से लेकर पीएसी ग्राउंड पर तैयारी करने वाली अंतरराष्ट्रीय एथलीटों में डिस्कस थ्रोअर सीमा अंतिल, जेवलिन थ्रोअर, अन्नू रानी, पैदल चाल की धाविका प्रियंका गोस्वामी और पारुल चौधरी समेत कई अन्य ने लगातार पदक जीतकर नई पीढ़ी को ट्रैक एंड फील्ड के लिए प्रेरित किया है। एथलेक्टिस कोच गौरव त्यागी बताते हैं कि दौड़, कूद और थ्रो को लेकर खिलाड़ियों में क्रेज है। इसके लिए दर्जनों एथलीट रोज संपर्क कर रहे हैं। एथलीट कड़ी मेहनत करने एवं सिंथेटिक ट्रैक की तलाश में सोनीपत, पानीपत, रोहतक एवं अन्य शहरों तक भी जाने को तैयार हैं।

पदक की बाधा

पटियाला विवि का उदाहरण सामने है, जहां से कई जांबाज खिलाड़ी निकले हैं। मेरठ में बेशुमार खेल प्रतिभाएं हैं, जिनके लिए स्टेडियम, कोच, स्पोर्ट्स मेडिसिन एवं फिटनेस जैसी सुविधाएं जरूरी हैं। यह सुविधाएं खेल विवि खुलने से मिलेंगी। सन 2024 और 2028 ओलिंपिक में पदक जीतना है तो हमें चीन की तरह इंफ्रास्ट्रक्चर देना ही होगा। -योगेंद्र सिंह, उत्तर प्रदेश पुलिस कोच

मेरठ के खेलकूद में बड़ा बदलाव आया है। नई पीढ़ी रिकाìडग व यू-ट्यूब से भी सीख रही है। बैडमिंटन, टीटी, कुश्ती, बाक्सिंग, निशानेबाजी के साथ ही अब एथलेक्टिस में भी बड़ी संख्या में बच्चे आ रहे हैं। स्टेडियम सर्वाधिक जरूरी है। खेल विवि में सिंथेटिक ट्रैक लगने पर बड़ी स्पर्धाएं आयोजित हो सकेंगी। इससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुधरेगा।

गौरव त्यागी, एनआइएस कोच 

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