आंदोलन पर शंकराचार्य का बयान, हठधर्मिता छोड़ें कि‍सान, बातचीत से बीच का रास्ता निकाले सरकार

काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती।

Shankaracharya Swami Narendranand Saraswati बुलंदशहर के गुलावठी में काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने पत्रकार वार्ता के दौरान गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन पर कहा कि आंदोलित किसान हठधर्मिता छोड़नी चाहिए।

Taruna TayalMon, 01 Mar 2021 01:36 PM (IST)

बुलंदशहर, जेएनएन। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने पत्रकार वार्ता के दौरान गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन पर कहा कि आंदोलित किसान हठधर्मिता छोड़नी चाहिए। उन्होंने सरकार को भी इस मामले में समाधान के लिए किसानों से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि कृषि कानून में 8-10 बिंदु है वह किसान हित में नही है लेकिन तीन कानून में लगभग 50 धाराएं है वह किसान हित मे है। किसान आंदोलन को विदेशों के अलावा कुछ राजनीतिक दलों से फंडिंग हो रही है। आंदोलन को दीर्घकाल तक चलाने की योजना है। इस आंदोलन में पचास प्रतिशत लोग खरीदकर लाए गए है। उन्होंने हिन्दू समाज से संगठित होने पर जोर दिया। कहा कि धर्म के आधार पर ही देश का विभाजन हुआ है। भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना समय की जरूरत है। इसलिए केंद्र सरकार साल दो साल के अंदर अध्यादेश लाकर भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करे। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने कहा कि अयोध्या करोड़ो वर्ष से हिन्दू समाज की आस्था, श्रद्धा, भक्ति का केंद्र रहा है। हजारो साल हजारों राम भक्तो का बलिदान, संघर्ष ओर न्याय पालिका की सक्रियता के चलते अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। जो बहुसंख्यक समाज की विजय है।

हरिद्वार में होने जा रहे महा कुंभ के सवाल पर कहा कि कुम्भ ज्ञान का अमृत है। जिसमे स्नान करने से मनुष्य की प्रतिरोधक छमता बढ़ती है। जिसके बाद शंकराचार्य मोहल्ला रामनगर में संकट मोचन मंदिर पर पहुँचे। जहां पर काफी संख्या में लोगो ने उनका स्वागत किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। 

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