यात्रियों से ठसा ठस भरी बस को किया सीज

यात्रियों से ठसा ठस भरी बस को किया सीज

देर रात यात्रियों से ठसा ठस भरी बस को पुलिसकर्मियों ने तेजगढ़ी चौराहे पर रोक लिया।

JagranMon, 19 Apr 2021 04:10 AM (IST)

मेरठ,जेएनएन। देर रात यात्रियों से ठसा ठस भरी बस को पुलिसकर्मियों ने तेजगढ़ी चौराहे पर रोक लिया। बस के अंदर क्षमता से ज्यादा सवारी होने पर उन्होंने आरटीओ विभाग को सूचना दी। जिसके बाद बस को सीज कर दिया गया। बस में बैठी सवारियों को दूसरी बस की व्यवस्था कराकर उन्हें सोहराब गेट डिपो भिजवाया गया। तेज गढ़ी चौराहे पर मेडिकल पुलिस चेकिग कर रही थी। उसी दौरान हरिद्वार से सवारी लेकर सीतापुर जा रही बस को पुलिसर्किमयों ने रोक लिया। चालक ने बस के अंदर यात्री क्षमता से ज्यादा बैठा रखे थे। पुलिसर्किमयों ने दस्तावेज चेक किये तो चालक के कई चालान पहले ही कटे हुए थे। ऐसे में उन्होंने आरटीओ विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर बस को सीज कर दिया।पुलिस कार्रवाई से बस में बैठे यात्री घबरा गए और चौकी के बाहर यात्रियों की भीड़ लग गई। पुलिसर्किमयों ने शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए सभी यात्रियों को दूसरी बस की व्यवस्था कराकर सोहराब गेट डिपो भेज दिया।

एक चौथाई बसों का ही हुआ संचालन: लाकडाउन के दिन बस अड्डों पर यात्रियों का टोटा रहा। सिटी स्टेशन पर ट्रेनों से यात्रियों का आवागमन कम हुआ। कई जगह सोमवार को पंचायत चुनाव होने के कारण यात्री गंतव्य को रवाना हुए। मतदान करने का उत्साह इतना ज्यादा रहा कि लाकडाउन में लोग परिवार सहित बस अड्डे पहुंचे।

भैंसाली पर सुबह से ही डिपो में बसों की कतारें लगी थीं लेकिन बैठने के लिए यात्री नहीं थे। सुबह सात से आठ बजे के बीच ऐसे यात्री गए जिन्हें शनिवार की देर रात साधन न मिलने पर रुकना पड़ा था। बिजनौर और कौशांबी के लिए सुबह के समय एक दर्जन बसें रवाना होने के बाद सन्नाटा रहा। 26 यात्रियों के लिए बसें कई-कई घंटे खड़ी रहीं। यही हाल सोहराबगेट डिपो का रहा। यहां पर एक चौथाई बसें ही चलीं। स्टेशन इंचार्ज आसिफ ने बताया कि 86 बसें प्रतिदिन निकलती हैं। रविवार को 24-25 बसें ही निकल सकीं। आगरा और गजरौला जा रहे यात्रियों ने बताया कि उनके यहां पर सोमवार को चुनाव है इसलिए आज निकलना मजबूरी है। एक यात्री ने बताया कि वह पानीपत से आ रहा है। बस ने यहां पर उतार दिया है यहां से गजरौला जाऊंगा। बताया कि प्रत्याशी परिवार का है इसलिए वोट जरूर डालना है। इसी तरह गोरखपुर जा रहे एक परिवार ने बताया कि आठ-नौ माह से घर नहीं गए इसलिए जा रहे हैं।

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